अस्थमा अटैक का जोखिम
- फोटो : Freepik
प्रदूषण से बचाव के लिए करें उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, वायु प्रदूषण के उच्च स्तर के संपर्क में आने से आंख, नाक और गले में जलन, सांस लेने में तकलीफ और खांसी होती है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी बीमारी वाले व्यक्तियों में लक्षण बिगड़ने लगते हैं, जिससे अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए ये और भी खतरनाक है।
वायु की बिगड़ती गुणवत्ता को देखते हुए बाहरी गतिविधियों को सीमित करना जरूरी है। जब तक जरूर न हो घरों से बाहर न जाएं। बाहर जाना जरूरी हो तो मास्क जरूर लगाएं। अस्थमा के रोगी हमेशा अपने साथ इनहेलर जरूर रखें। घर के भीतर की हवा को साफ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।