फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

AIIMS Study: 38% आबादी इस गंभीर रोग की शिकार, युवाओं में खतरा सबसे अधिक, कहीं आपमें भी तो नहीं हैं ऐसे लक्षण?

Sun, 30 Jul 2023 04:49 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
लिवर की समस्याओं के जोखिम - फोटो : iStock
लिवर की बीमारियां वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही हैं, विशेषज्ञ कहते हैं, युवाओं में तेजी से बढ़ती ये समस्या काफी चिंताजनक है। कम उम्र में ही लोगों में लिवर की बीमारी, विशेषतौर पर नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर (एनएएफएलडी) डिजीज विकसित होने का जोखिम अधिक देखा जा रहा है।

युवाओं मे बढ़ती इस गंभीर समस्या के बारे में समझने के लिए एम्स के विशेषज्ञों ने अध्ययन किया। इसके विश्लेषण में शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि देश की कम से कम एक तिहाई आबादी (38 प्रतिशत से अधिक) में एनएएफएलडी की समस्या हो सकती है जो निश्चित ही एक गंभीर विषय है।

जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल हेपेटोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि यह समस्या केवल वयस्कों तक ही सीमित नहीं है, लगभग 35 प्रतिशत बच्चों में भी ये दिक्कत देखी जा रही है। गौरतलब है कि लिवर की इस समस्या के कई गंभीर स्वास्थ्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जिसको लेकर सभी उम्र के लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। एनएएफएलडी किसी भी आयु के व्यक्ति को प्रभावित करने वाली स्थिति हो सकती है।
विज्ञापन

2 of 5
फैटी लिवर का खतरा - फोटो : iStock
एनएएफएलडी की नहीं हो पा रही है समय पर पहचान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम ने बताया, ज्यादातर लोगों में  नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर की पहचान नहीं हो पा रही है। इस बीमारी के प्रारंभिक चरणों में अक्सर कोई भी लक्षण नजर नहीं आते हैं, जिससे रोगियों को अपनी समस्या के बारे में पता ही नहीं चल पाता है। कई कारण हैं जो इस बीमारी के जोखिमों को बढ़ाने वाले हो सकते हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को निरंतर सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
विज्ञापन

3 of 5
फैटी लीवर के जोखिम कारकों को बारे में जानिए - फोटो : iStock
आहार की गड़बड़ी के कारण बढ़ रहा है जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, फैटी लीवर या स्टीटोहेपेटाइटिस का एक प्रमुख कारण हमारे आहार में गड़बड़ी होना माना जा सकता है। जिस प्रकार से हमारे भोजन में पश्चिमी चीजें बढ़ रही हैं उसने जोखिमों को और भी बढ़ा दिया है। विशेषतौर पर फास्ट फूड्स की बढ़ी हुई मात्रा के साथ आहार में फलों-सब्जियों की कमी और गतिहीन जीवनशैली की आदतों के चलते इस रोग के विकसित होने का खतरा और भी बढ़ गया है।

4 of 5
नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर के जोखिम कारक - फोटो : iStock
हार्ट-डायबिटीज की तरह ही गंभीर है ये बीमारी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, इस बीमारी को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिज्म से संबंधित अन्य समस्याओं की तरह से गंभीरता से देखा जाना चाहिए। हालांकि दुर्भाग्यवश फिलहाल हमारे पास फैटी लिवर की समस्या के लिए वर्तमान में न तो कोई विशिष्ट दवा है न ही कोई उपचार। बड़ी संख्या में युवा तेजी से इसके शिकार होते जा रहे हैं, लिवर की इस बीमारी के कई गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं जिसको लेकर सभी लोगों को सावधान रहना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
लिवर को स्वस्थ रखने के करें उपाय - फोटो : Pixabay
एनएएफएलडी से सभी लोगों को करना चाहिए बचाव

डॉक्टर्स कहते हैं, तेजी से बढ़ते इस नए स्वास्थ्य जोखिम से बचने का एकमात्र तरीका स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना और आहार को स्वस्थ रखना है। ऐसा करके हम इन स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिमों को भी कंट्रोल कर सकेंगे जो इस रोग को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि शराब का सेवन करना, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता के कारण भी इस रोग का खतरा बढ़ रहा है, हमें इस दिशा में भी विशेष सुधार की आवश्यकता है। लिवर की इस बीमारी का बढ़ना गंभीर स्वास्थ्य संकेत हो सकता है।


----------------
स्रोत और संदर्भ
NAFLD: Do we need to lean-in deeper to manage it better?

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें