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Alert: अक्सर समोसे-पकौड़े खाते हैं तो हो जाइए सावधान, ये चीजें बढ़ा रही हैं गंभीर 'महामारी' का खतरा

Tue, 08 Oct 2024 12:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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समोसा और तली हुई चीजें - फोटो : Freepik.com
वैश्विक स्तर पर बढ़ती कई तरह की क्रोनिक बीमारियों के लिए लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी को प्रमुख कारण माना जाता रहा है। हम जो कुछ भी खाते हैं, शरीर पर उसका सीधा असर होता है। यही कारण है कि सभी लोगों को अपने खान-पान को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है। अधिक शर्करा, हाई कैलोरी वाली चीजों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों की समस्याओं को बढ़ाने वाला माना जाता रहा है।

भले ही आपकी उम्र कम है फिर भी आप डायबिटीज के शिकार हो सकते हैं, दुनियाभर में बड़ी संख्या में कम उम्र के लोगों को डायबिटीज का रोगी पाया जा रहा है। 

मधुमेह के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए एक हालिया अध्ययन में विशेषज्ञों ने उन लोगों को चेताया है जो अक्सर समोसे, पकौड़े और चिप्स जैसी चीजें खाते हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि समोसा, पकौड़े, चिप्स जैसे तले हुए खाद्य पदार्थों के सेवन से भारत में मधुमेह 'महामारी' बढ़ती जा रही है। इसके पहले के कई अध्ययनों में भी भारतीय आबादी में बढ़ती इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जताते रहे हैं।
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
भारतीय लोगों में डायबिटीज का खतरा

आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में मधुमेह एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन और आईसीएमआर द्वारा किए गए अध्ययन से पता चला है कि भारत में 101 मिलियन (10.1 करोड़) से अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित हैं, वहीं 13 करोड़ से अधिक लोग प्री-डायबिटिक स्थिति में हैं जिनमें भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा हो सकता है। 

अध्ययन के आधार पर विशेषज्ञों ने बताया कि बढ़ती डायबिटीज की समस्या के लिए खान-पान में गड़बड़ी प्रमुख कारण हो सकती है।
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खान-पान पर रखें ध्यान - फोटो : Freepik.com
एडवांस ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स (एजीई) वाली चीजें नुकसानदायक

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फूड साइंसेज एंड न्यूट्रिशन में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने डायबिटीज के खतरे के लिए एडवांस ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स (एजीई) वाली चीजों के सेवन को बड़ा जोखिम कारक माना है। केक, चिप्स, कुकीज, तले हुए खाद्य पदार्थ, मेयोनीज और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में एजीई की मात्रा अधिक होती है। अपनी तरह का यह पहला क्लिनिकल परीक्षण है।

विशेषज्ञों ने कहा, हम खतरनाक स्थिति में हैं, डायबिटीज के कारण स्वास्थ्य क्षेत्र पर दबाव बढ़ता जा रहा है, इसे नियंत्रित किया जाना बहुत आवश्यक है।

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क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? - फोटो : freepik
क्या होती है एजीई?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया एडवांस ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स (एजीई) संभावित रूप से जहरीले यौगिक होते हैं, ये प्रोटीन या लिपिड के ग्लाइकेट होने पर बनते हैं। अध्ययन में पाया गया कि एजीई युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से शरीर में इंफ्लामेशन का खतरा बढ़ने लग जाता है जिसे मधुमेह के लिए जिम्मेदार माना जाता है। विशेषज्ञों ने कहा, सभी लोगों को इस तरह की चीजों का सेवन कम से कम करना चाहिए, विशेषतौर पर बच्चों को ये ज्यादा पसंद होती हैं। बच्चे भी डायबिटीज रोग का शिकार हो रहे हैं।
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खान-पान को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com
हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजें भी हानिकारक 

चिप्स, फ्राइड चिकन, समोसे, पकौड़े, तले खाद्य पदार्थ, कुकीज, केक के अलावा बेक्ड और प्रोसेस्ड चीजों में एजीई की मात्रा अधिक होती है, इनके अधिक सेवन से डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विशेषज्ञ हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजों के भी सेवन से परहेज करने की सलाह देते हैं। इनसे तेजी से शुगर लेवल बढ़ने का खतरा हो सकता है। जिन खाद्य पदार्थों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 55 से अधिक होता है उनसे डायबिटीज बढ़ने का जोखिम अधिक हो सकता है।


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 स्रोत और संदर्भृ
Advanced glycation end-products (AGEs) in foods and their detecting techniques and methods: A review


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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