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Stroke: हर साल 1.5 करोड़ से अधिक लोग होते हैं स्ट्रोक का शिकार, ये फार्मूला बचा सकता है आपकी जान

Mon, 07 Oct 2024 07:31 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ब्रेन स्ट्रोक के कारण होने वाली समस्या - फोटो : Freepik.com
दुनियाभर में जिन स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हर साल सबसे ज्यादा लोगों की मौत होती है, हार्ट अटैक और स्ट्रोक उसमें प्रमुख हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ब्रेन स्ट्रोक के मामले साल-दर-साल बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार हर साल विश्वभर में 15 मिलियन (1.5 करोड़) लोग स्ट्रोक से पीड़ित होते हैं, इनमें से करीब 5 मिलियन (50 लाख) लोगों की मृत्यु हो जाती है।

इतना ही नहीं स्ट्रोक के बाद जिंदा बचने वाले करीब 50 लाख लोग स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं। कई मायनों में स्ट्रोक गंभीर स्वास्थ्य संकट है, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्ट्रोक के बढ़ते जोखिमों के लिए कई कारणों को जिम्मेदार माना जा रहा है, लाइफस्टाइल और आहार की गड़बड़ी इसका प्रमुख वजह हो सकती है। वैसे तो 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में स्ट्रोक होना असामान्य माना जाता है हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस आयु वर्ग में भी ये समस्या तेजी से बढ़ी है। इसमें से ज्यादातर लोगों को हाई ब्लड प्रेशर का शिकार पाया गया।

विशेषज्ञ कहते हैं, यदि स्ट्रोक के लक्षणों की समय पर पहचान होकर इसका इलाज हो जाए तो न सिर्फ रोगी की जान बच सकती है, साथ ही स्ट्रोक के कारण होने वाली अन्य जटिलताओं को भी कम किया जा सकता है।
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युवाओं में स्ट्रोक के मामले - फोटो : freepik.com
स्ट्रोक का खतरा

स्ट्रोक वैसे दो प्रकार का होता है- इस्केमिक स्ट्रोक और हेमोरेजिक (रक्तस्रावी) स्ट्रोक। आमतौर पर मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित या कम हो जाने के कारण स्ट्रोक होता है। वहीं रक्तस्रावी स्ट्रोक मस्तिष्क में रक्त वाहिका के रिसाव या फटने के कारण होता है।

स्ट्रोक एक आपातकाल की स्थिति है जिसमें तुरंत उपचार प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। स्ट्रोक की पहचान के लिए विशेषज्ञों ने एक फार्मूला बताया है, जिसकी मदद से आसानी से जाना जा सकता है कि किसी को स्ट्रोक तो नहीं हुआ है?
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सिरदर्द - फोटो : freepik.com
पहले इसके लक्षणों के बारे में जानिए

स्ट्रोक की समय रहते पहचान के लिए सबसे पहले कुछ लक्षणों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। स्ट्रोक की स्थिति में सिर में बहुत असहनीय दर्द की समस्या हो सकती है, ये इसका सबसे आम लक्षण है। इसके अलावा पीड़ित व्यक्ति भ्रमित हो सकता है, बोलने या किसी की बातों को समझने में कठिनाई हो सकती है।

स्ट्रोक होने पर चेहरे, हाथ या पैर सुन्न हो सकते हैं, इनमें कमजोरी या लकवा जैसी समस्या हो सकती है। यदि व्यक्ति अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाने की कोशिश करे तो अक्सर एक हाथ कमजोर होकर नीचे गिरने लगता है। इसमें शारीरिक संतुलन भी बिगड़ जाता है जिससे चलना कठिन हो जाता है।

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ब्रेन स्ट्रोक की पहचान - फोटो : Freepik.com
स्ट्रोक की पहचान के लिए फार्मूला

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानने के लिए एक फार्मूला है- FAST जिसके माध्यम से आसानी से पता किया जा सकता है कि किसी को स्ट्रोक हुआ है या नहीं। इन चार चीजों की तुरंत जांच करें।
  • F (Face Drooping): क्या चेहरा एक तरफ झुक गया है?
  • A (Arm Weakness): क्या एक हाथ कमजोर है या गिर रहा है?
  • S (Speech Difficulty): क्या बोलने में दिक्कत है?
  • T (Time to Call Emergency): यदि हां, तो तुरंत आपातकालीन सेवाओं को कॉल करें।
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ब्लड प्रेशर को रखें कंट्रोल - फोटो : Freepik.com
स्ट्रोक से बचाव के करें उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और धूम्रपान-शराब से दूरी बनाकर आप स्ट्रोक के खतरे को कम कर सकते हैं। स्ट्रोक जानलेवा तो है ही, वहीं इससे बचे लोगों में लकवा जैसी समस्याओं का भी खतरा हो सकता है। बढ़ती ब्लड प्रेशर की समस्या को युवाओं में स्ट्रोक के लिए प्रमुख कारण माना जाता रहा है।

डॉक्टर कहते हैं, 30 की उम्र के बाद सभी लोगों को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच और इसे कंट्रोल में रखने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी आपको इस जानलेवा जोखिम से बचाने में मददगार हो सकती है। 


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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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