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Pneumonia: निमोनिया ने ले ली इस मशहूर एक्टर की जान, जानिए क्यों खतरनाक है ये बीमारी और आप कैसे बचें?

Thu, 16 Jul 2026 08:13 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, निमोनिया दुनिया भर में बच्चों और बुजुर्गों में मौत का एक प्रमुख कारण है।निमोनिया में फेफड़ों के छोटे-छोटे वायुकोष में संक्रमण हो जाता है। इनमें तरल पदार्थ भरने लगता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
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निमोनिया की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों में निमोनिया को सबसे गंभीर संक्रमणों में से एक माना जाता है। अक्सर लोग इसे सामान्य सर्दी, खांसी या वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई मामलों में यही लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

13 जून को  जुरासिक पार्क के मशहूर अभिनेता सैम नील की निमोनिया से हुई मौत की खबर ने एक बार फिर इस बीमारी को चर्चा में ला दिया है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर निमोनिया होता क्यों है और समय रहते इसके लक्षणों को कैसे पहचाना जा सकता है?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि न्यूमोनिया फेफड़ों में होने वाला एक गंभीर संक्रमण है। बैक्टीरिया, वायरस या फंगस, इन तीनों के कारण हो सकता है। निमोनिया के कारण फेफड़ों के वायुकोषों  में सूजन आ जाती है और उनमें तरल पदार्थ या मवाद भर जाता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। मरीजों को खांसी और बुखार भी होता रहता है। समय रहते अगर इसका इलाज न हो पाए और संक्रमण ज्यादा फैल जाए तो इससे मौत भी हो सकती है।
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फेफड़ों में संक्रमण की समस्या - फोटो : Adobe Stock
निमोनिया की समस्या के बारे में जानिए

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, निमोनिया दुनिया भर में बच्चों और बुजुर्गों में मौत का एक प्रमुख कारण है। हालांकि यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है।
 
  • 5 साल से छोटे बच्चों, 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों में इसका खतरा अधिक होता है।
  • हालांकि समय पर पहचान और सही इलाज से अधिकांश मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। 

डॉक्टर कहते हैं, निमोनिया कई प्रकार के सूक्ष्मजीवों से हो सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में कुछ फंगस भी निमोनिया पैदा कर सकते हैं। कई बार वायरल संक्रमण के बाद शरीर कमजोर होने पर बैक्टीरियल निमोनिया विकसित हो जाता है। धूम्रपान, वायु प्रदूषण और पुरानी फेफड़ों की बीमारी भी जोखिम बढ़ाते हैं।
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निमोनिया के कारण सांस की समस्या - फोटो : Adobe Stock
निमोनिया की पहचान कैस करें?

डॉक्टर बताते हैं, निमोनिया होने पर अक्सर तेज बुखार, ठंड लगने, लगातार खांसी, बलगम आने और सांस फूलने की समस्या हो सकती है।
 
  • कुछ लोगों में सिरदर्द, भूख कम लगने और शरीर दर्द भी हो सकता है। 
  • बुजुर्गों में कई बार तेज बुखार नहीं आता, बल्कि भ्रम, सुस्ती या अचानक कमजोरी ही पहला संकेत हो सकता है। 
  • छोटे बच्चों में तेजी से सांस चलना और दूध पीने में परेशानी होना भी इसका संकेत हो सकता है।
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निमोनिया के खतरे को जानिए - फोटो : Freepik.com
सामान्य सर्दी-खांसी और निमोनिया में क्या अंतर है?

डॉक्टर कहते हैं, सामान्य वायरल संक्रमण और सर्दी-जुकाम में अक्सर नाक बहने, हल्का बुखार और गले में खराश होती है। जबकि निमोनिया में तेज बुखार के साथ सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द और लगातार खांसी हो सकती है। यदि बुखार कई दिन तक बना रहे, शरीर में ऑक्सीजन कम होने लगे या सांस लेने में परेशानी बढ़े, तो इसे सामान्य वायरल संक्रमण मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।


निमोनिया हो जाए तो क्या करें?

डॉक्टर कहते हैं, निमोनिया किस कारण से है, उसका इलाज भी इसपर निर्भर करता है। 
  • बैक्टीरियल निमोनिया में डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं, जबकि वायरल निमोनिया में अधिकतर मामलों में सहायक उपचार किया जाता है। 
  • गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन थेरेपी और जरूरत पड़ने पर आईसीयू में भर्ती करना पड़ सकता है। 
  • हालांकि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक नहीं लेना चाहिए।

हाथों की नियमित सफाई, खांसते या छींकते समय मुंह ढकना, धूम्रपान से बचना, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम संक्रमण के खतरे को कम कर सकते हैं। जोखिम वाले लोगों के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार निमोकोकल वैक्सीन और इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लगवानी चाहिए।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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