निमोनिया के खतरे को जानिए
- फोटो : Freepik.com
सामान्य सर्दी-खांसी और निमोनिया में क्या अंतर है?
डॉक्टर कहते हैं, सामान्य वायरल संक्रमण और सर्दी-जुकाम में अक्सर नाक बहने, हल्का बुखार और गले में खराश होती है। जबकि निमोनिया में तेज बुखार के साथ सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द और लगातार खांसी हो सकती है। यदि बुखार कई दिन तक बना रहे, शरीर में ऑक्सीजन कम होने लगे या सांस लेने में परेशानी बढ़े, तो इसे सामान्य वायरल संक्रमण मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
निमोनिया हो जाए तो क्या करें?
डॉक्टर कहते हैं, निमोनिया किस कारण से है, उसका इलाज भी इसपर निर्भर करता है।
- बैक्टीरियल निमोनिया में डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं, जबकि वायरल निमोनिया में अधिकतर मामलों में सहायक उपचार किया जाता है।
- गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन थेरेपी और जरूरत पड़ने पर आईसीयू में भर्ती करना पड़ सकता है।
- हालांकि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक नहीं लेना चाहिए।
हाथों की नियमित सफाई, खांसते या छींकते समय मुंह ढकना, धूम्रपान से बचना, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम संक्रमण के खतरे को कम कर सकते हैं। जोखिम वाले लोगों के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार निमोकोकल वैक्सीन और इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लगवानी चाहिए।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।