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ये हो सकते हैं अल्जाइमर बीमारी के शुरुआती संकेत, अध्ययन में सामने आईं कई चौंकाने वाली बातें

Fri, 22 Jan 2021 06:46 PM IST
प्रकाश चंद जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कब किसी व्यक्ति को कौन सी बीमारी हो जाए, इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन हमारा रहन सहन और खानपान इन बीमारियों से हमें दूर रखने में मदद जरूर करता है। बात अगर अल्जाइमर रोग की ही करें तो ये डिमेंशिया रोग का आम प्रकार है, जिससे व्यक्ति की याददाश्त और सोचने संबंधी आदतें प्रभावित होती है। इस बीमारी को लेकर कई तरह के अध्ययन पहले सामने आ चुके हैं, लेकिन अल्जाइमर को लेकर एक और अध्ययन सामने आया है, जिसमें इसके शुरुआती संकेत के बारे में बताया गया है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दरअसल, कनाडा की डी मॉन्ट्रियल यूनिवर्सिटी से एक शोध सामने आया है। जहां इस बीमारी के प्रारंभिक संकेत को लेकर बताया गया है। शोधकर्ता सिल्वी बेलेविले के मुताबिक, अल्जाइमर रोग प्रगतिशील है और ये निदान से 20 से 30 साल पहले ही मस्तिष्क में उभर सकता है। मतलब कि ये रोग काफी तेज फैल सकता है और इसी को लेकर ये अध्ययन सामने आया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डायग्नोसिस असेसमेंट एंड डिसीज मॉनिटरिंग जर्नल में ये अध्ययन प्रकाशित हुआ। इसके मुताबिक, टीम ने अल्जाइमर रोग के विकास के एक उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के समूहों में मस्तिष्क सक्रियण का अध्ययन करने के लिए अल्जाइमर रोग की प्रारंभिक पहचान के लिए कंसोर्टियम से डेटा का इस्तेमाल किया।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इसमें एक समूह में 28 व्यक्ति शामिल थे जो अपनी याददाश्त खोने के बारे में चिंतित थे, लेकिन उनको ऐसी किसी तरह की परेशानी नहीं हुई थी। जबकि दूसरे समूह में हल्के लक्षण वाले 26 व्यक्तियों को शामिल किया गया था। यहां शोधकर्ताओं ने पाया कि पहले समूह में व्यक्ति, या वो लोग जिन्हें अपनी याददाश्त खोने का डर था, उनमें अल्जाइमर रोग से प्रभावित मस्तिष्क के कई प्रमुख क्षेत्रों में असामान्य रूप से उच्च स्तर की सक्रियता थी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ये अध्ययन बताता है कि उन लोगों के मस्तिष्क के कुछ क्षेत्रों में अल्जाइमर की सक्रियता है, जो अपनी याददाश्त खोने के बारे में चिंतित थे लेकिन उनमें ऐसे कोई लक्षण नजर नहीं आए थे। वहीं, शोधकर्ता ने कहा कि, हल्के संज्ञानात्मक दोष वाले व्यक्ति, जिन्हें रोग के अधिक उन्नत चरण में माना जाता है, इनके मस्तिष्क क्षेत्रों में इस रोग की सक्रियता कम हो गई है।
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