मेंटल हेल्थ की समस्याएं
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क्या कहते हैं मनोचिकित्सक?
अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं, बाहर से सब ठीक दिखने का मतलब ये नहीं है कि व्यक्ति अंदर से भी ठीक हो। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के निदान के दौरान कई बार देखने को मिलता है कि मरीज काम कर रहे होते है, पढ़ाई चल रही होती है, दोस्तों से बातचीत भी हो रही है, फिर भी दिल और दिमाग में चल रही उथल-पुथल किसी से कहने का मन नहीं करता।
युवाओं में भावनात्मक तनाव और मानसिक परेशानी को लेकर चुप्पी एक गंभीर चिंता का विषय है। आमतौर पर इसके लिए सामाजिक कलंक के भाव को सबसे बड़ी वजह के रूप में देखा जाता है। मरीजों को डर रहता है कि डॉक्टर के पास गए तो लोग क्या सोचेंगे, ये पागल हो गया है?
जबकि असलियत ये है कि बीमारी को छिपाना, आपके लिए समस्याओं को हर दिन के साथ और बढ़ाता जाता है। जिस स्ट्रेस-एंग्जाइटी को समय रहते ध्यान देकर ठीक किया जा सकता था, उसे लंबे समय तक छिपाए रहना कई बार डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्या के रूप में सामने आता है।