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Diabetes: डायबिटीज को लेकर सामने आई बेहद चिंताजनक रिपोर्ट, बढ़ता जा रहा है 'साइलेंट महामारी' का खतरा

Tue, 09 Sep 2025 07:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • डायबिटीज को लेकर किए गए एक हालिया विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने पाया कि साल 2023 में दुनिया के लगभग 44 प्रतिशत मधुमेह रोगियों को पता ही नहीं था कि उन्हें ये बीमारी है।
  • निदान में कमी और ब्लड शुगर हाई बने रहने की स्थिति निम्न और मध्यम आय वाले देशों में बड़ी चुनौतियां पेश कर रही हैं।
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डायबिटीज और इसका खतरा - फोटो : Adobe stock
Diabetes Worldwide: डायबिटीज वैश्विक आबादी के लिए गंभीर चिंता का कारण बनी हुई है, साल-दर-साल इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं। पिछले एक दशक में भारतीय आबादी में भी ये बीमारी तेजी से बढ़ी है। साल 2023 में किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि भारत में 10.1 करोड़ (101 मिलियन) से अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित थे। इसके अलावा भारत में मधुमेह और अन्य मेटाबॉलिज्म से संबंधित गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का प्रसार पहले के अनुमान से काफी अधिक हो गया है। देश में डायबिटीज के बढ़ते मामलों के कारण भारत को 'डायबिटीज कैपिटल' भी कहा जाने लगा है।

ग्रामीण भारत में समय पर रोग का निदान और इलाज न हो पाना, इस बीमारी की रोकथाम के लिए चिंता का कारण तो है ही, पर इससे भी बड़ी समस्या ये है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिन्हें पता ही नहीं है कि वह मधुमेह का शिकार हैं। भारतीय स्वास्थ्य संस्थानों की रिपोर्ट बताती हैं कि देश में लाखों लोग बिना इलाज के और बिना ये जाने कि उन्हें डायबिटीज है, जी रहे हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर समय पर जांच और इलाज न किया जाए तो ये बीमारी शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसी स्थिति में आंखों की रोशनी कम होने, किडनी की बीमारी, दिल के दौरे का खतरा, नसों में कमजोरी, घाव जल्दी न भरने जैसी समस्याएं धीरे-धीरे बढ़ती जाती हैं।
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डायबिटीज का निदान से संबंधित समस्याएं - फोटो : Adobe stock
हालिया रिपोर्ट काफी चिंताजनक

डायबिटीज को लेकर किए गए एक हालिया विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने पाया कि साल 2023 में दुनिया के लगभग 44 प्रतिशत मधुमेह रोगियों को पता ही नहीं था कि उन्हें ये बीमारी है। निदान में कमी और ब्लड शुगर हाई बने रहने की स्थिति निम्न और मध्यम आय वाले देशों में बड़ी चुनौतियां पेश कर रही हैं। 

द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अनुमान बताते हैं कि भारत में भी ये समस्या बड़े स्तर पर देखी जा रही है। साल 2023 में भारत में अन-डायग्नोस डायबिटीज वालों की दर 43.6 प्रतिशत के करीब थी।
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डायबिटीज और इससे संबंधित जोखिम - फोटो : Freepik.com
विशेषज्ञों ने जताई चिंता- बन सकती है मूक महामारी

अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय की शोधकर्ता और इस अध्ययन की प्रमुख लेखिका लॉरिन स्टैफोर्ड कहती हैं, साल 2050 तक 1.3 अरब लोगों के मधुमेह से पीड़ित होने की संभावना है और यदि उनमें से लगभग आधे लोगों को पता ही नहीं है कि उन्हें कोई गंभीर और संभावित रूप से घातक स्वास्थ्य समस्या है, तो यह आसानी से एक मूक महामारी बन सकती है।

इस टीम में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के शोधकर्ता भी शामिल थे।
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डायबिटीज को कंट्रोल रखना जरूरी - फोटो : Freepik.com
क्या कहती है रिपोर्ट?

रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर डायबिटीज के निदान की सबसे ज्यादा दरें उत्तरी अमेरिका में देखी गईं और निदान किए गए लोगों में उपचार की सबसे ज्यादा दर उच्च आय वाले एशिया पेसिफिक (जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों) में देखी गईं।
  • चिली और अर्जेंटीना सहित दक्षिणी लैटिन अमेरिका में मधुमेह का इलाज करा रहे लोगों में ऑप्टिमल ग्लाइसेमिक लेवल की दर सबसे ज्यादा पाई गई।
  • मध्य उप-सहारा अफ्रीका में निदान में सबसे ज्यादा अंतर है, जहां मधुमेह से पीड़ित 20 प्रतिशत से भी कम लोग इस स्थिति के बारे में जानते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मई 2022 में साल 2030 तक मधुमेह से पीड़ित 80 प्रतिशत लोगों का चिकित्सकीय निदान करने का लक्ष्य रखा था। डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि जिन लोगों का निदान किया गया है, उनमें से 80 प्रतिशत लोगों का इलाज और प्रबंधन ऐसा होना चाहिए जिससे ग्लाइसेमिया (ब्लड शुगर) और रक्तचाप पर भी अच्छा नियंत्रण रहे।

इस हालिया रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज के मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए, युवाओं के बीच स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में निवेश की तत्काल आवश्यकता है। दवाओं और ग्लूकोज-निगरानी उपकरणों तक पहुंच में सुधार हुआ है, इसकी पहुंच को लोगों तक और आसान बनाने की जरूरत है।



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स्रोत
Global, regional, and national cascades of diabetes care, 2000–23: a systematic review and modelling analysis using findings from the Global Burden of Disease Study


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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