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कोरोना काल में कम हुए हार्ट अटैक के मामले, सामने आईं ये पांच बड़ी वजहें

Thu, 02 Jul 2020 12:57 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Heart attack - फोटो : Pixabay
डॉक्टर और विशेषज्ञों का कहना है कि इस कोरोना काल में हार्टअटैक के मामले पूरी दुनिया में 30 फीसदी कम हुए हैं। इसके पीछे कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण हमारी जीवनशैली में आए सुधार बड़ी वजह हैं। दुनियाभर के 10 हजार हृदय रोग विशेषज्ञों ने 'एशिया पेसेफिक वैस्कुलर इंटरवेंशन सोसाइटी' के संयोजन में हुए वेबिनार में ये बातें सामने आई हैं। इसमें भारत समेत कई देशों से विशेषज्ञों ने भाग लिया और कोरोना काल और उससे पूर्व समय में होने वाले हार्ट अटैक के तुलनात्मक अध्ययन पर चर्चा की। विशेषज्ञों के मुताबिक, एक लाख में से 433 युवाओं को हर्ट अटैक से मौत होने का खतरा है। 45 से 50 फीसदी मामलों में बिना लक्षण वाले हर्ट अटैक आते हैं। हर्ट अटैक को लेकर ऐसे ही कई और चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 
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Heart attack - फोटो : Pixabay
चिकित्सा क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार विजेता यूएसए के प्रो. फरीद मुराद, अपोलो ग्रुप के सलाहकार और हृदयरोग विभागाध्यक्ष प्रो. एनएन खन्ना समेत कई विशेषज्ञ इस बात पर सहमत थे कि हर्ट अटैक के मरीज या तो बहुत कम हो गए हैं या फिर अस्पतालों में कम पहुंच रहे हैं। हार्ट अटैक के लिए ट्रिगर माने जाने वाले कई रिस्क फैक्टर, जैसे कि बाहर का खानपान, प्रदूषण जैसी चीजें कोरोना काल में नहीं के बराबर हुई हैं। इस वजह से जो लोग पहले से ही हर्ट अटैक के रिस्क फैक्टर में थे, उन्हें रिलैक्स मिला यानी वे हर्ट अटैक से बच गए।
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हर्ट अटैक - फोटो : pixaby
विशेषज्ञों के मुताबिक, लॉकडाउन हार्ट अटैक रोगियों के लिए बड़ा फायदेमंद साबित हुआ है। अब विस्तार से इस बात का पता लगाने की कोशिश हो रही है कि वे कौन से रिस्क फैक्टर हैं जो कोरोना काल में कम हुए हैं और जिसका सीधा असर साइलेंट यानी बिना लक्षणों वाले हर्ट अटैक पर हुआ है। 'एशिया पेसेफिक वैस्कुलर इंटरवेंशन सोसाइटी' की ओर से इसके अध्ययन के लिए टीम गठित की गई है। 
 

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Heart attack - फोटो : Social Media
कैसे आता है हर्ट अटैक?
दिल में ब्लड की आपूर्ति न होने पर दिल की मांसपेशियों का खराब होना, हृदय की धमनियों और नसों में खून के थक्के जमने से हर्ट अटैक आ सकता है। सही समय पर कदम उठाने से हर्ट अटैक का इलाज संभव है, लेकिन कई बार समय रहते पीड़ित को अस्पताल न पहुंचाया जाए तो उसकी मौत भी हो सकती है।
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Heart attack - फोटो : Pixabay
हर्ट अटैक में ऐसे लक्षण दिखते हैं: 
  • अचानक छाती में बाईं ओर दर्द, सांस की तकलीफ
  • घबराहट, मिचली, तनाव, थकान, मन अशांत, चक्कर आना
  • अपच, कमजोरी, बेचैनी, खांसी के दौरे आदि 
दिल का दौरा पड़ने पर सीने में अक्सर तेज दर्द उठता है, लेकिन कुछ लोगों को हल्का दर्द भी होता है। कई बार महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों को इस दर्द का एहसास नहीं होता।
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Heart attack - फोटो : Pixabay
हर्ट अटैक के जोखिम कारक(Risk Factor):
  • पहले से हृदय रोग हो, तंबाकू या धूम्रपान का सेवन
  • डायबिटीज यानी मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा
  • गुर्दे की पुरानी बीमारी, गलत खानपान, प्रदूषण
  • अत्यधिक शराब पीना, कोकीन और मेथमपेटामाइन ड्रग्स
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स
कोरोना काल में इन कारणों से कम हुए हर्ट अटैक के मामले
  • कल-कारखाने बंद रहने और वाहनों के कम चलने से वायु और ध्वनि प्रदूषण कम हो गया
  • लॉकडाउन के दौरान लोगों ने भरपूर नींद ली, शरीर को अधिक आराम मिला
  • रोजमर्रा की आपाधापी से दूर रहे लोग, घर में तनाव भी कम रहा
  • बाहर के खानपान पर रोक, घरेलू शुद्ध और संतुलित भोजन खाने लगे लोग
  • कोरोना के भय से धूम्रपान पर नियंत्रण, सिगरेट-शराब की डोज कम हुई
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Heart Attack - फोटो : Social Media
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना काल में न केवल भारत में हर्ट अटैक के मामले कम हुए, बल्कि विदेशों में भी यही स्थिति सामने आई है। हालांकि विशेषज्ञों ने हर्ट अटैक के जोखिम कारकों पर अभी और विस्तार से अध्ययन करने की जरूरत बताई है। विशेषज्ञों की सलाह है कि फिलहाल हर्ट अटैक के जो ज्ञात जोखिम कारक हैं, उनसे बचने की जरूरत है। 
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