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चिंताजनक: 15 करोड़ से अधिक भारतीयों पर गंभीर स्वास्थ्य संकट, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ऐसी गलती?

Thu, 12 Sep 2024 02:28 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सेंडेंटरी लाइफस्टाइल का खतरा - फोटो : istock
शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए पौष्टिक आहार का सेवन और व्यायाम, दो सबसे जरूरी और प्रभावी तरीके माने जाते रहे हैं। डायबिटीज-हृदय रोगों से लेकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव में भी इन उपायों को कारगर पाया गया है। जिस तरह से आहार की गुणवत्ता में कमी और प्रोसेस्ड-जंक फूड्स शरीर को रोगी बना सकते हैं उसी तरह से शारीरिक गतिविधि और नियमित व्यायाम की कमी के कारण भी कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। एक हालिया रिपोर्ट में भारतीयों में इससे संबंधित बढ़ती समस्याओं को लेकर चिंता जताई गई है।

डालबर्ग की स्टेट ऑफ स्पोर्ट्स एंड फिजिकल एक्टिविटी (एसएपीए) की रिपोर्ट के अनुसार 155 मिलियन (15.5 करोड़) से अधिक भारतीय वयस्क और 45 मिलियन (4.5 करोड़) से अधिक किशोर शारीरिक रूप से कम सक्रिय हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोग सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशा-निर्देशों को पूरा करने में विफल पाए गए हैं।

इस आधार पर विशषज्ञों का कहना है कि करोड़ों भारतीय लोगों में शारीरिक निष्क्रियता के चलते गंभीर और क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है।
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नियमित व्यायाम सभी के लिए जरूरी - फोटो : istock
डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस 

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक वयस्कों को प्रति सप्ताह 150-300 मिनट की मध्यम स्तरीय एरोबिक गतिविधि या 75-150 मिनट की तीव्र स्तरीय शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए। बुजुर्गों या क्रोनिक बीमारियों के शिकार लोगों को गिरने से बचने और संतुलन बढ़ाने के लिए हल्के स्तर के व्यायाम और भी जरूरी हो जाते हैं।

हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करोड़ों लोग शारीरिक रूप से निष्क्रिय हैं और सेंडेंटरी लाइफस्टाइल का शिकार हैं। ये रिपोर्ट भारतीयों में खेल और व्यायाम के प्रति ध्यान की कमी की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है।
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महिलाओं में शारीरिक निष्क्रियता का खतरा - फोटो : istock
महिलाएं और भी कम सक्रिय

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैसे तो अधिकांश लोग दैनिक कामों के अलावा वॉक जरूर करते हैं, पैदल चलने के अपने फायदे हैं, लेकिन स्वस्थ शरीर के लिए यही पर्याप्त नहीं है। लगभग 10 प्रतिशत वयस्क खेलकूद में तो संलग्न हैं पर नियमित नहीं हैं।

खेल और शारीरिक गतिविधियों में लैंगिक भेदभाव भी बहुत चिंताजनक है। औसतन, लड़कियां और महिलाएं शारीरिक गतिविधियों में पुरुषों की तुलना में कम समय बिताती हैं। शहरों में ये और भी बदतर है, जहां एक तिहाई लड़कियां और महिलाएं डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों को पूरा नहीं करती हैं। 

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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : istock
क्रोनिक बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि शारीरिक गतिविधियों और व्यायाम में कमी एक गंभीर समस्या है जिसके कारण भविष्य में कई प्रकार की गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का संकट बढ़ सकता है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग सहित कई प्रकार की जानलेवा बीमारियों के लिए शारीरिक गतिविधियों में कमी को प्रमुख कारण माना जाता है। अगर ऐसी ही स्थिति जारी रही तो भविष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र पर गंभीर दबाव की स्थिति बन सकती है।

विशेषतौर पर किशोरों में बढ़ती शारीरिक निष्क्रियता और चिंताजनक है क्योंकि इससे भविष्य पर असर हो सकता है। 
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शारीरिक निष्क्रियता खतरनाक - फोटो : istock
थोड़े से प्रयास से कम कर सकते हैं स्वास्थ्य पर मोटा खर्च

सर्वेक्षण के अनुसार, यदि देश की पूरी आबादी 2047 तक सक्रिय हो जाती है, तो भारत की जीडीपी 15 ट्रिलियन रुपये से अधिक बढ़ सकती है। यह 110 मिलियन (11 करोड़) से अधिक वयस्कों में बने नॉन कम्युनिकेबल डिजीज के खतरे को रोकने और स्वास्थ्य सेवा लागत में 30 ट्रिलियन रुपये को बचा सकती है। आमतौर पर मोटापे, हृदय रोगों और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में मोटा पैसा खर्च किया जाता है। शारीरिक गतिविधियों में सुधार करके इन समस्याओं से बच सकते है। बच्चों में बाहर खेलकूद की आदत बनाना सबसे जरूरी है। 



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स्रोत और संदर्भ
A fully active India by 2047 can boost GDP by over INR 15 trillion annually

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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