इबोला का खतरा
- फोटो : Freepik.com
मृत्यु दर अधिक
इबोला की सबसे खतरनाक बात इसकी उच्च मृत्यु दर है। कई प्रकोपों में देखा गया है कि संक्रमित लोगों में इससे मौत का खतरा 35-50% तक रहा है।
- यह वायरस शरीर के पूरे तंत्र लिवर, किडनी और ब्लड सिस्टम को प्रभावित कर देता है।
- जब शरीर के जरूरी अंग एक साथ काम करना बंद कर देते हैं तो इलाज मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे घातक वायरसों में गिना जाता है।
सीमित इलाज और शुरुआती पहचान की कठिनाई
इबोला का कोई पुख्ता इलाज नहीं है। कुछ दवाएं और वैक्सीन उपलब्ध हैं, लेकिन वे आमतौर पर पुराने स्ट्रेन्स के खिलाफ सुरक्षा देने वाली मानी जाती रही हैं।
- सबसे बड़ी चुनौती इसकी शुरुआती पहचान है क्योंकि इसके लक्षण सामान्य वायरल फीवर जैसे लगते हैं।
- कई बार मरीज अस्पताल देर से पहुंचते हैं, जिससे इलाज का असर कम हो जाता है।
- बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए कोई वैक्सीन नहीं है जो इसे और भी खतरनाक संक्रामक बीमारी बना देती है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।