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Ebola Outbreak: एक महीने से भी कम समय में विकराल रूप ले चुका है इबोला, जानिए क्या चीजें बनाती हैं इसे खतरनाक

Tue, 09 Jun 2026 02:21 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इबोला की सबसे डरावनी बात सिर्फ इसका संक्रमण नहीं, बल्कि इसकी तेजी और गंभीरता है। यह शरीर के अंदर गंभीर ब्लीडिंग, अंगों के फेल होने और तेज बुखार जैसी गंभीर स्थितियों को जन्म देता है। एक महीने के भीतर इबोला ने कम से कम 100 लोगों की जान ले ली है।
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इबोला वायरस का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
अफ्रीकी देश कांगो और यूगांडा में लोगों के लिए काल बनकर फैला इबोला वायरस, अब यूरोप सहित एशियाई देशों के लिए भी चिंता बढ़ाता जा रहा है। जारी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के कारण भारत में भी इबोला का खतरा लगातार बना हुआ है। वैसे तो भारत में अभी तक इसके किसी मामले की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों में विदेशों से लौटे कुछ संदिग्ध मामले जरूर सामने आए हैं।

6 जून को अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने जयपुर और हैदराबाद में संदिग्ध मामले की जानकारी दी थी। इससे पहले बंगलूरू और गुजरात में भी संदिग्धों की खबर सामने आई थी।

संक्रमण के प्रसार और जोखिमों को देखते हुए अमेरिका, भारत सहित कई देशों ने हवाई अड्डों पर यात्रियों की जांच बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस पहले ही कह चुके हैं कि इबोला विशेषज्ञों की सोच से भी तेज गति से फैल रहा है।

कांगो से आ रही हालिया जानकारी के मुताबिक यहां एक महीने से भी कम समय में इबोला ने जो रूप लिया है वो काफी डराने वाला है।
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इबोला साबित हो रहा घातक - फोटो : Adobe Stock
कांगो में 550 से अधिक केस, 100 की मौत

हालिया रिपोर्ट में अधिकारियों ने बताया कि पूर्वी कांगो में इस बीमारी के फैलने की घोषणा के एक महीने से भी कम समय में कम से कम 100 लोगों की मौत हो चुकी है।
 
  • सोमवार देर रात आई ताजा रिपोर्ट के अनुसार, रविवार तक बीमारी के 550 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 101 लोगों की मौत हुई है और 19 लोग ठीक हुए हैं। 
  • हालांकि, माना जा रहा है कि मामलों की संख्या इससे ज्यादा हो सकती है क्योंकि बीमारी के फैलने की पुष्टि कई हफ्तों बाद हुई थी। 
  • इससे निपटने में इसलिए भी मुश्किल आ रही है क्योंकि इस वायरस के लिए अब तक कोई प्रमाणित वैक्सीन या इलाज नहीं है।

इबोला का ये प्रकोप दुर्लभ बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैला है। कांगों में पहले भी इस बीमारी के करीब 16 प्रकोप देखे जा चुके हैं, लेकिन पुराने स्ट्रेनों के विपरीत इस नई स्ट्रेन को कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा है क्योंकि पुराने टीके इसपर काम नहीं कर रहे और मौजूदा स्ट्रेन को रोकने के लिए कोई वैक्सीन नहीं है।
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इबोला हो सकता है खतरनाक - फोटो : Adobe Stock Photo
क्यों खतरनाक माना जाता है इबोला?

इबोला को लेकर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि कुछ स्थितियां इबोला को बहुत खतरनाक बना देती हैं।

इबोला की सबसे डरावनी बात इसका संक्रमण और गंभीरता है। यह शरीर के अंदर गंभीर ब्लीडिंग, ऑर्गन फेलियर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। कई बार मरीज को शुरुआती लक्षण समझ ही नहीं आते और स्थिति अचानक गंभीर हो जाती है। आइए जान लेते हैं कि इबोला को इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?


शरीर पर तेजी से करता है अटैक
 
  • इबोला वायरस की संक्रमण दर कोरोना जैसे श्वसन वायरस की तरह तेज नहीं है, हालांकि एक बार यह शरीर में प्रवेश कर जाए तो कुछ ही दिनों में यह पूरे शरीर को प्रभावित करना शुरू कर देता है। 
  • शुरुआती लक्षण जैसे बुखार, कमजोरी और सिरदर्द सामान्य फ्लू जैसे लगते हैं, लेकिन वायरस अंदर ही अंदर खून की नसों और अंगों को प्रभावित करता रहता है। 
  • जैसे ही वायरस बढ़ता है, शरीर में गंभीर रक्तस्राव, अंगों के फेल होने जैसी स्थिति पैदा कर देता है।
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इबोला का खतरा - फोटो : Freepik.com
मृत्यु दर अधिक

इबोला की सबसे खतरनाक बात इसकी उच्च मृत्यु दर है। कई प्रकोपों में देखा गया है कि संक्रमित लोगों में इससे मौत का खतरा 35-50% तक रहा है। 
 
  • यह वायरस शरीर के पूरे तंत्र लिवर, किडनी और ब्लड सिस्टम को प्रभावित कर देता है। 
  • जब शरीर के जरूरी अंग एक साथ काम करना बंद कर देते हैं तो इलाज मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे घातक वायरसों में गिना जाता है।


सीमित इलाज और शुरुआती पहचान की कठिनाई

इबोला का कोई पुख्ता इलाज नहीं है। कुछ दवाएं और वैक्सीन उपलब्ध हैं, लेकिन वे आमतौर पर पुराने स्ट्रेन्स के खिलाफ सुरक्षा देने वाली मानी जाती रही हैं।
 
  • सबसे बड़ी चुनौती इसकी शुरुआती पहचान है क्योंकि इसके लक्षण सामान्य वायरल फीवर जैसे लगते हैं। 
  • कई बार मरीज अस्पताल देर से पहुंचते हैं, जिससे इलाज का असर कम हो जाता है। 
  • बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए कोई वैक्सीन नहीं है जो इसे और भी खतरनाक संक्रामक बीमारी बना देती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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