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CoronaVirus: इन 10 संभावनाओं और आशंकाओं की वजह से सर्दियों में कहर बरपा सकता है कोरोना वायरस

Mon, 19 Oct 2020 04:01 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
चीन के वुहान में पिछले साल आखिरी महीनों में कोरोना वायरस का मामला सार्वजनिक तौर पर सामने आया था। इसके दो से तीन महीने के अंदर कोरोना कई देशों में पांव पसार चुका था। अक्सर सर्दियों में वायरल संक्रमण की आशंका के मद्देनजर यह कहा जा रहा था कि गर्मी आने पर यह वायरस अन्य बीमारियों की तरह खत्म हो जाएगा या कम हो जाएगा। हालांकि ऐसा हुआ नहीं। अब फिर से सर्दियों का मौसम आने वाला है और यह कहा जा रहा है कि सर्दियों में कोरोना वायरस ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। सर्दियों में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर की आशंका भारत के लिए चिंता का विषय है। सर्दियों में महामारी की दूसरी लहर आती है तो स्थिति अधिक बिगड़ सकती है। 
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Coronavirus infection - फोटो : Pixabay
कोरोना महामारी से निपटने के लिए और इस दिशा में चल रहे प्रयासों के समन्वयन के लिए देश में गठित केंद्रीय विशेषज्ञ पैनल के प्रमुख और नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने भी माना है कि सर्दियों में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर आ सकती है। उन्होंने कहा है, सर्दियों का मौसम आ रहा है तो यूरोप के देशों में कोविड-19 के मामलों का बढ़ना शुरू हो चुका है। हम भी इस संभावना से इनकार नहीं कर सकते हैं। सर्दियों में कोरोना की दूसरी लहर आने की आशंका पर उन्होंने कहा कि हम अभी भी वायरस के बारे में सीख रहे हैं, बहुत-सी चीजें हो सकती हैं। सर्दियों में कोरोना संक्रमण बढ़ने के पीछे कई वजहें गिनाई जा रही हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में: 
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कोरोना वायरस के कारण ब्रिटेन में भी हालात खराब होते जा रहे हैं(File Photo) - फोटो : PTI
  • ब्रिटेन में सर्दियों की शुरुआत के साथ कोरोना के मामलों में 40 फीसदी की वृद्धि देखी जा रही है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि इस सर्दी ब्रिटेन में 1.20 लाख से ज्यादा मौतें हो सकती हैं। 
  • कोरोना वायरस पहली बार नवंबर 2019 में वुहान में पाया गया था और दिसंबर में अन्य जगहों पर भी फैलना शुरू हो गया था, इसलिए भी संभावना जताई जा रही है कि नवंबर-दिसंबर में इसका प्रसार बढ़ सकता है। 

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ब्रिटेन में कोरोना संक्रमण गंभीर है (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • कोरोना महामारी के शुरुआती महीनों के दौरान संक्रमण फैलने के बाद यह अफवाह थी कि गर्मी के मौसम में कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा। गर्मी गुजरी, मॉनसून भी गुजर गया, लेकिन कोरोना वायरस के मामले कम नहीं हुए। कोरोना वायरस पर हुए कुछ अध्ययनों में बताया गया है कि इस पर मौसम के तापमान का बहुत असर नहीं पड़ता। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
  • सर्दियों में मौसमी बीमारियों ओर दूसरे तरह के फ्लू के पनपने की ज्यादा आशंका रहती है। ऐसा भी देखा गया है कि सर्दियों में वायरल संक्रमण के मामले बढ़ते हैं। कोरोना भी एक तरह का वायरल संक्रमण ही है,  इसलिए इसको लेकर भी ऐसी आशंका जताई जा रही है। हालांकि इस पर किसी शोध के जरिए पुष्टि नहीं हुई है। 
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स्पेनिश फ्लू: 100 साल पहले फैली थी यह खतरनाक बीमारी - फोटो : Social media
  • पूर्व में फैली बीमारियों के संबंध में हुए शोध अध्ययनों से पता चलता है कि स्पेनिश फ्लू, एशियाई फ्लू, हांगकांग फ्लू आदि श्वसन संबंधी महामारियों के एक बार खत्म होने या नियंत्रित होने के छह महीने बाद फिर से दूसरी लहर सामने आई थी। इसी तरह कोरोना वायरस के बारे में कहा जा रहा है कि इसकी दूसरी लहर सर्दियों में आ सकती है। 
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लोगों की यात्राएं बढ़ेंगी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
  • भारत में अनलॉक की प्रक्रिया जारी है। रेस्त्रां, थियेटर वगैरह खुल चुके हैं और अब सीमित संख्या के साथ समारोह भी होने लगे हैं। इसके साथ ही त्योहारों की वजह से सार्वजनिक परिवहन(ट्रेन, बस, प्लेन) आदि के जरिए लोगों की यात्राएं बढ़ेंगी। उत्तर भारत के लोग दिवाली, छठ वगैरह में बड़ी संख्या में अपने घर लौटते हैं। इन कारणों से भी कोरोना के मामले बढ़ने की आशंका है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • कोरोना के व्यवहार में अबतक मौसम परिवर्तन के कारण कोई बदलाव नहीं दिखा है, लेकिन जिन देशों में तापमान में गिरावट होती जा रही है, वहां मामले बढ़ रहे हैं। भारत में भी आने वाले महीनों में तापमान में गिरावट होती है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि ठंड बढ़ने पर कोरोना का प्रसार बढ़ सकता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • कुछ अध्ययनों में कहा गया है कि सर्दियों में सांस संबंधी समस्याएं बढ़ती है। जिन्हें पहले से ऐसी कोई समस्या है, उनके लिए कोरोना खतरनाक साबित हो सकता है। एक अन्य अध्ययन में यह भी कहा गया है कि महाराष्ट्र में स्वाइन फ्लू के मामले सर्दियों में ज्यादा आते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
  • सांस की समस्या वाले लोगों के लिए सर्दियों का मौसम इसलिए भी परेशान करने वाला होता है, क्योंकि सर्दियों के दौरान महानगरों में प्रदूषण बढ़ता है। दिल्ली में तो अभी से ही हवा खराब होने लगी है। पर्यावरणविदों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने खासतौर पर कोविड-19 के हमले की चपेट में आने की सबसे ज्यादा संभावना वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा है, क्योंकि हवा में मौजूद प्रदूषण की पुरानी बीमारी का संबंध गंभीर संक्रमण और मौत से ज्यादा होता है। 
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दिल्ली में प्रदूषण का धुंध(File Photo) - फोटो : अमर उजाला
  • जलवायु के क्षेत्र में काम करने वाले ग्रीनपीस इंडिया के अविनाश चंचल के मुताबिक, इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि वायु प्रदूषण बढ़ने पर श्वसन तंत्र से जुड़े संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लोग प्रदूषण के कारण अपने फेफड़ों में सिकुड़न महसूस कर सकते हैं, जो कोविड-19 की चपेट में आने पर न्यूमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों में बदल सकता है।
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