Khichdi
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सब कुछ बजट में
वन पॉट कुकिंग आपके बजट के लिए भी अच्छा है। इस कुकिंग स्टाइल में उन्हीं चीजों का प्रयोग करते हैं, जिन्हें आसानी से खरीदा जा सकता है। इस स्टाइल से बना खाना स्वादिष्ट होता है, इसलिए अतिरिक्त रूप से बचता भी नहीं है। वहीं, प्रायः लोग इस स्टाइल से उतना ही खाना बनाते हैं, जितने की जरूरत होती है। जब आप विभिन्न सब्जियों, दालों और अनाजों को मिलाकर कोई डिश बनाती हैं तो आमतौर पर अकेले पकाए जाने की तुलना में सारी चीजें कम ही लगती हैं, जिससे बजट के बिगड़ने की चिंता भी नहीं रहती।
ये बातें भी खास
वन पॉट कुकिंग के लिए उपयोग में आने वाला बर्तन बड़ा और गहरा होना चाहिए, ताकि सभी चीजों को उसमें आराम से डाला और पकाया जा सके। आप पकाने के लिए चाहे जो भी बर्तन चुनें, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि उसमें से खाना पकते समय बाहर न निकले और अच्छी तरह से पक भी जाए। एक अन्य बात का ध्यान रखें कि बर्तन की तली में खाना पकने में अधिक समय लगता है। इसलिए पकाते समय पहले उन चीजों की लेयरिंग करें, जो पकने में ज्यादा समय लेती हैं। उसके बाद उन चीजों की लेयर बनाएं, जो जल्दी पक जाती हैं। इस तरह हर एक चीज को एक के ऊपर एक लेयरिंग कर सजाएं, ताकि कोई भी चीज न तो बहुत ज्यादा पके और न ही कच्ची रह जाए।
अपनी व्यस्त जीवन-शैली के कारण भले ही आप हर दिन अपनी मेज रंग-बिरंगी डिशेज से न भर पाएं, लेकिन वन पॉट कुकिंग के जरिये एक संपूर्ण और शानदार भोजन तो बना ही सकती हैं, जो कुकिंग करने के शौक के साथ ही आपकी सेहत को भी बनाए रखेगा।
आसान और सेहतमंद तरीका
आहार विशेषज्ञ अंशु चौहान बताती हैं, आजकल की व्यस्त लाइफस्टाइल में ऐसे खाने का विशेष महत्व है, जो समय की बचत के साथ-साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर हो। वन पॉट कुकिंग भी ऐसी ही एक विधि है। इस विधि में बिरयानी/खिचड़ी जैसे कई व्यंजन शामिल होते हैं, जो कि कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। यह आहार स्वास्थ्य के लिए एक संतुलित आहार भी है।
वन पॉट कुकिंग में एक ही बर्तन में पूरा खाना बनता है। इस तरह भोजन को बनाना सुविधाजनक होता है, साथ ही सब चीजों को सही ताप पर अच्छी तरह से पकाया जाता है। वहीं इसके बाद धोने के लिए बर्तन भी कम होते हैं। ऐसा देखा जाता है कि जो लोग सप्ताह में पांच बार घर का बना खाना खाते हैं, उनमें स्वस्थ बीएमआई यानी शरीर द्रव्यमान सूचकांक ठीक रहता है, साथ ही कम कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर की भी कम संभावनाएं रहती हैं, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार होता है। इस प्रकार यह खाना पकाने का एक आसान, स्वास्थ्यवर्धक और कम बजट वाला तरीका है, जो कि बाहर के खाने से कई गुना हेल्दी और साफ-सुथरे तरीके से बना होता है।