प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : फाइल फोटो
एक निजी कंपनी में काम करने वाली सना (बदला हुआ नाम) कहती हैं, "कल रात मैं 12 बजे भी काम में उलझी थी। आज मेरी मीटिंग थी तो मुझे आज का काम भी कल ही करना पड़ा। ऑफिस में बैठकर काम करना आसान होता है। वहां कोई चीज किसी को दिखानी है, अप्रूव करानी है तो मौके पर ही हो जाती है, वहां बेहतर ढंग से समझाया जा सकता है लेकिन फोन पर यह काम थोड़ा मुश्किल हो रहा है और कम्युनिकेशन गैप की वजह से काम और बिखर रहा है।"