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लॉकडाउन में ढील और विज्ञान का कनेक्शन, कैसे बचा जाए संक्रमण से?

Mon, 25 May 2020 04:31 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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महिला के शरीर के तापमान की जांच करता एक स्वास्थ्यकर्मी - फोटो : PTI
नीतिनिर्माताओं का कहना है कि वो कोरोना वायरस से संबंधित किसी भी तरह के दिशा-निर्देश के लिए विज्ञान के नियमों का पालन कर रहे हैं। तो क्या लॉकडाउन में ढील देने को लेकर भी ऐसा किया जा रहा है? ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इंग्लैंड में लॉकडाउन में छूट देने को लेकर एक योजना का जिक्र किया है, जिसके काफी कुछ समझने को मिल सकता है। 

उनकी योजना के मुताबिक, लॉकडाउन में छूट चरणबद्ध तरीके से धीरे-धीरे दिए जाएंगे ताकि संक्रमण के दूसरे दौर से बचा जा सके। उनका कहना है कि यह योजना संक्रमण और मृत्यु दर कम होने की स्थिति में शर्तों के साथ होगी और अगर संक्रमण दर बढ़ने के कोई भी संकते मिलते हैं तो फिर से पाबंदियां लगा दी जाएंगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
नई योजना के तहत छोटे बच्चे जून की शुरुआत से स्कूल जाना शुरू करेंगे। पहली कक्षा से लेकर छठी कक्षा तक के बच्चे सबसे पहले स्कूल जाना शुरू करेंगे। लेकिन सवाल उठता है कि छोटे बच्चों को ही क्यों चुना गया सबसे पहले स्कूल जाने के लिए? इसे लेकर जो तर्क दिए गए हैं वो इस तरह से हैं- 
  • संक्रमित होने के बाद भी छोटे बच्चे के गंभीर रूप से बीमार होने की संभावना कम रहती है। 
  • स्कूल के बाहर भी बड़े बच्चों के काफी संपर्क रहते हैं। इसलिए उनके संक्रमण का खतरा ज्यादा है। 
  • बड़े बच्चे घर में बैठकर भी पढ़ाई कर सकते हैं. 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pexels.com
छोटे बच्चों में फ्लू होने की संभावना ज्यादा मानी जाती है, लेकिन कोविड-19 के मामले में उनके गंभीर रूप से बीमार होने की संभावना कम जान पड़ती है। साथ ही विशेषज्ञों को अभी इस बात का भी पता नहीं है कि किसी हद तक छोटे बच्चे कोरोना वायरस से बड़ों को संक्रमित कर सकते हैं। हालांकि छोटे बच्चों को मास्क पहनाए रखना मुश्किल है और उन्हें मास्क पहनने की सलाह भी नहीं दी गई है। वो सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन नहीं कर सकेंगे। इसलिए सारा ध्यान उनके हाथ धुलाने और दूसरे साफ-सफाई के तरीकों पर रहेगा। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सिर्फ एक व्यक्ति से मिलने का नियम क्यों?

ब्रिटेन में नई गाइडलाइन के हिसाब से लॉकडाउन में छूट के बाद एक वक्त में आप सिर्फ एक व्यक्ति से मिल सकते हैं, जबकि सैद्धांतिक तौर पर देखें तो आप एक व्यक्ति से मिलिए या फिर एक से ज्यादा व्यक्ति से, दोनों ही मामलों में जोखिम बराबर है। लेकिन ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैन्कॉक इसे लेकर कहते हैं कि एक व्यक्ति से मिलने का नियम अक जगह पर अधिक लोगों की भीड़ इकट्ठा नहीं होने देगा और फिर दो मीटर की दूरी बनाए रखने के सोशल डिस्टेंसिंग का आसानी से पालन हो सकता है। 

पूरी दुनिया में सोशल डिस्टेंसिंग के लिए दो मीटर की दूरी बनाए रखने को एक तरह से स्वीकृति मिली हुई है। इससे कम दूरी रखने वालों के साथ वायरस के संक्रमण का जोखिम ज्यादा रहता है। मौजूदा प्रमाण बताते हैं कि संक्रमित हाथ से आंख, नाक और मुंह छूने से कोरोना वायरस आम तौर पर फैल रहा है, न कि किसी वायरस लगे हुए चीज के संपर्क में आने से। लेकिन कुछ प्रमाण ऐसे मिले हैं जिनसे यह पता चला है कि कोरोना वायरस हवा में कुछ देर तक मौजूद रहता है खास तौर पर अस्पतालों में जहां इनके मरीजों का इलाज चल रहा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
आउटडोर गेम में छूट ना कि इंडोर गेम में, आखिर क्यों?

इस योजना में गोल्फ और टेनिस जैसे खेलों को छूट दी गई है लेकिन अकेले या फिर एक और व्यक्ति के साथ। वो व्यक्ति दूसरा कोई भी हो सकता है। इस हालत में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। हालांकि वैसे खेल या फिर जिम जहां करीबी संपर्क में आने की गुंजाइश है या फिर सतह को बार-बार छूना होता है, वो सब बंद रहेंगे। इंडोर गेम को इजाजत इसीलिए नहीं दी गई है क्योंकि वहां सतह पर वायरस के ठहरने की संभावना ज्यादा है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
मास्क पहनने को लेकर नियम में बदलाव क्यों?

माना जा रहा है कि लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद लोग बड़े पैमाने पर काम करने बसों और ट्रेनों से दफ्तर जाएंगे। इस दौरान बसों और ट्रेनों में काफी भीड़ होगी। नए दिशानिर्देश के अनुसार सरकार ने इस दौरान लोगों से मास्क जरूर पहनने की हिदायत दी है। सार्वजनिक परिवहनों और बाजारों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन संभव नहीं है, यहां आसानी से किसी भी अनजान व्यक्ति के संपर्क में आया जा सकता है, इसलिए इस दौरान मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है। 

यह पहले के नियम से अलग है। पहले सिर्फ बीमार लोगों से बचने के लिए ही मास्क पहनने की सलाह दी गई थी। विज्ञान के लिहाज से यह थोड़ा पेचीदा और विवादास्पद फैसला है लेकिन कुछ प्रमाणों से यह पता चला है कि मास्क पहनने से उन संक्रमित लोगों से बचा जा सकता है जिनमें संक्रमण के कोई लक्षण नहीं दिखाई पड़ते हैं, लेकिन वो दरअसल संक्रमित होते हैं और अनजाने में ही संक्रमण फैलाने की वजह बन जाते हैं।  
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