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Spring Season Images: यह बस बसंत का किया धरा है

Thu, 13 Mar 2025 05:54 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

इस ऋतु में सर्दियों की ठंडी हवाएं कम होने लगती हैं और तापमान बढ़ने लगता है। वसंत ऋतु को ऋतुराज कहते हैं क्योंकि यह सभी ऋतुओं में सबसे सुखद और उल्लासपूर्ण होती है।
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तस्वीरों में देखें वसंत ऋतु और कुछ पंक्तियों के समझें इस मौसम के बारे में। - फोटो : Subodh Holkar
Basant : बसंत ऋतु सर्दियों और गर्मियों के बीच आती है, जिसमें तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है। पेड़-पौधे नए पत्ते और फूल उगाते हैं। इस ऋतु में सर्दियों की ठंडी हवाएं कम होने लगती हैं और तापमान बढ़ने लगता है। वसंत ऋतु को ऋतुराज कहते हैं क्योंकि यह सभी ऋतुओं में सबसे सुखद और उल्लासपूर्ण होती है। जहां प्रकृति नवजीवन से भर जाती है। फूल खिलते हैं और मौसम सुहावना रहता है। इन तस्वीरों में देखें वसंत ऋतु और कुछ पंक्तियों के समझें इस मौसम के बारे में।

यह जो दिन होते हैं ना जालिम, यानी ऋतुराज बसंत के।
मुझ बदनसीब को हमेशा इसकी दोपहरें
कुछ ज्यादा जानलेवा लगती रही हैं, बनिस्बत इसकी रातों के।
बल्कि कुछ ज्यादा जुल्मपर्वर।

 
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बसंत ऋतु को ऋतुराज कहा जाता है - फोटो : Subodh

मैं जीता-जागता जैसे कोई खिलौना हूं इसके हाथ लगा।
खिलौने का कैसा दिल, क्या जज्बा!
खेल-खेल में दर्द के निराकार में घुलता-तड़पता।
जिसे ढाक के सूखे पत्ते में निकाल के रख दिया गया हो धूप में।
जिसके जलते दुख पर टेसू के रक्ताभ फूल बरसते रहते हों दिन-रात।


 
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ये मौसम ठंडक और गर्मी के बीच का होता है - फोटो : Subodh holkar

ऐसे में ठंडी नर्म बयार के गलबांही अचानक,
गर्म नहीं, गुनगुना सा हवा का झोंका
कंधा हिला कर दिवास्वप्न से जगाता गुजर जाता हो।
तन्द्रा टूट जाने मात्र से होता क्या है,
कोई परपीड़क अंदर नहीं तो बाहर दिखाई पड़ने लगता है।

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ये फूलों और पेड़-पौधों का मौसम है - फोटो : Subodh Holkar

बौराय आम की मादक खुशबू से
लदी-पगी हवाओं के छूकर गुजर जाने जैसा।
लहू में मध्यम आग लगाता
सुर्ख फूलों में खिला मचलता है राग!
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बसंत ऋतु की सुंदर तस्वीरें - फोटो : subodh holkar

सूखते जा रहे गेहूं के खेतों को
लहर-लहर लहराती
पागल हवा के मौन गीत सुनाती हैं आंखें।
किसी खुशनसीब की ही सुनी जाने के लिए।
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यह बस बसंत का किया धरा है - फोटो : Subodh

एक ऐसा ज्वार जोकि राजेंद्र सिंह बेदी को पढ़ते हुए जिस्म में डूबता उतराता है।
जिसे इस्मत चुगताई कहती हैं 'यह बस बसंत का किया धरा है'।

सुबोध होलकर
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