दुनिया में वैश्विक स्तर पर कोरोना संकट इंसानों की ही देन है। प्रकृति से लगातार हो रही छेड़छाड़ से मानव जीवन के सामने कई गंभीर चुनौतियां और समस्याएं खड़ी हो गई हैं। हम आज भी कोरोना से सीख न लेकर विकास, अर्थव्यवस्था और दूसरी चीजों को तवज्जो दे रहे हैं, जबकि पर्यावरण संतुलन पर ध्यान केंद्रित नहीं किया जा रहा है। हमें जानवरों, पेड़ पौधों, पहाड़ों, ग्लेशियर आदि प्राकृतिक स्रोतों से संतुलन कायम रखना होगा। यह कहना है कि जम्मू कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व चेयरमैन व वरिष्ठ पर्यावरणविद डॉ. चंद्र मोहन सेठ का।