2016 को भारतीय सेना की एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक के लिए भी याद किया जाएगा जिसमें सेना ने पाक के आतंकी कैंप को अपनी जांबाज कार्रवाई के बल पर नेस्तनाबूत कर दिया था। तत्कालीन डीजीएमओ रणबीर सिंह की देखरेख में हुए इस ऑपरेशन में पाक ने आतंक के कई ऐसे ठिकाने तबाह किए जिनमें हिंदुस्तान के खिलाफ बड़ी साजिश करने की तैयारियां चल रही थी। जानें, अमावस की रात कैसे हुई थी आतंकियों के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई।
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भारतीय सेना
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पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल आपरेशन के लिए कमाडो को मात्र दो घंटे का समय दिया गया था। इस आपरेशन में 125 कमांडो डोगरा और बिहार रेजिमेंट के थे।
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आसमान पर करीब 35 हजार फुट की ऊंचाई से भारतीय वायु सेना के हेलीकाप्टर इस आपरेशन की निगरानी कर थे। दोनों रेजिमेंट से तैयार विशेष संयुक्त पैरा कमांडो ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
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28 सितंबर रात दो बजकर दस मिनट पर पुंछ से एलओसी पार कर कमांडो पाक अधिकृत कश्मीर के भिंबर, कैल क्षेत्र स्थित कैंप में पहुंचे। हमले से पहले कैंप की पूरी जानकारी हासिल कर ली गई थी।
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प्रशिक्षु आतंकी किस समय सोेते हैं और कब खाना खाते हैं, इसकी जानकारी भी ली गई थी। स्ट्राइक में आतंकी कैंप में दो दर्जन से अधिक आतंकी मारे गए। सीमा पार तारबंदी तोड़कर घुसे इन पैरा कमांडो में 125 जवान मौजूद थे।
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केवल 35 कमांडो ही कैंप के अंदर गए और बाकी कैंप के बाहर थे जो आपरेशन को कवर कर रहे थे, ताकि बाहरी हमले से बचा जा सके। पाक सेना को ध्यान बंटाने के लिए पुंछ व उड़ी सेक्टर पर एलओसी पर फायरिंग भी की गई।
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फायरिंग से ध्यान बंटाने के दौैरान ही सीमा पार कर कर ली गई। आतंकी कैंप एलओसी से 12-15 किलोमीटर दूर थे। इस बीच, आसमान पर हेलीकाप्टर भी आपरेशन की पूरी निगरानी कर रहे थे, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में कमांडो को सुरक्षित वापस लाया जा सके।
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स्वतंत्रता दिवस के बाद ही कमांडो को विशेष ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी गई थी। एक गाइड भी उनके साथ था, जो एक साल से आतंकी ट्रेनिंग कैंप में मौजूद था। पांच टीमों ने अलग-अलग तरीके से आतंकी कैंपों पर हमला किया।
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उनके फोन भी बंद कर दिए गए थे। वह घर से भी एक महीने से दूर थे और घर में भी बात करने की इजाजत नहीं थी। पूरा आपरेशन उत्तरी कमान के नेतृत्व में हुआ।
कमांडो का चयन पंजाब, जम्मू, हिमाचल प्रदेश से हुआ और विशेष टीम का गठन किया गया। सुबह साढ़े चार बजे सभी कमांडो पैदल मार्ग से ही सफल होकर वापस आए। इस आपरेशन में शामिल कमांडोे के अनुसार उन्हें पूरे आपरेशन के लिए केवल दो घंटे का समय दिया गया था।