आज जम्मू-कश्मीर रियासत के महाराजा हरि सिंह का जन्मदिन है । 23 सितंबर 1895 को जम्मू में जन्में महाराजा हरि सिंह को देश उस निर्णायक प्रशासक के रूप में याद कर रहा है जिनके निर्णय नें जम्मू और कश्मीर रियासत में रहने वाले हर इंसान की जिंदगी बदल दी थी । कैसा था महाराजा हरि सिंह का जीवन देखें तस्वीरें-
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महाराजा हरि सिंह
- फोटो : File Photo
हरि सिंह का जन्म 23 सितंबर 1895 को जम्मू के अमर महल में हुआ । अमर महल जम्मू-कश्मीर रियासत के तत्कालीन राजा अमर सिंह जामवाल का शाही महल था । हरि सिंह की प्रारंभिक शिक्षा अजमेर के मायो कालेज में हुई ।
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राजा हरि सिंह
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हरि सिंह के मायो कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही उनके पिता राजा अमर सिंह की 1909 में मृत्यु हो गई थी । हरि सिंह के अभिवावक के तौर पर ब्रिटिश सरकार ने मेजर एचके बरार को नियुक्त किया था ।
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हरि सिंह
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हरि सिंह को 22 वर्ष की उम्र में ब्रिटिश सेना की ओर से जम्मू-कश्मीर में कमांडर इन चीफ के रूप में नियुक्ति मिली थी । इस नियुक्ति से पहले हरि सिंह देहरादून के इम्पीरियल कैडेट कार्प में पढ़ाई कर रहे थे जिसे कि तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा संचालित किया जाता था ।
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हरि सिंह को महाराजा बनाया गया
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1925 में अपने चाचा रणबीर सिंह की मृत्यु के बाद हरि सिंह को जम्मू-कश्मीर रियासत का राजा बनाया गया था । महाराजा बनने के बाद हरि सिंह ने सबसे पहले जम्मू-कश्मीर रियासत में सभी के लिए प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य कर दिया जिसे एक बड़े फैसले के रूप में जाना जाता है । प्राथमिक शिक्षा की अनिवार्यता के साथ ही हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर रियासत में बाल विवाह, जातिप्रथा, वेश्यावृत्ति रोकने समेत कई सामाजिक सुधारों के लिए काम किया ।
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महाराजा हरि सिंह
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हरि सिंह ने 4 शादियां की थी । उनकी रानी तारा देवी से महाराजा हरि सिंह की एकलौती संतान कर्ण सिंह हैं ।
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कर्ण सिंह
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कर्ण सिंह वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता और राज्यसभा के सदस्य हैं । कर्ण सिंह वाराणसी में स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं ।
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हरि सिंह
- फोटो : File Photo
हरि सिंह को भी स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और कश्मीर के बड़े नेता शेख अब्दुल्ला का करीबी माना जाता था ।
हरि सिंह को भारत की स्वतंत्रता के बाद जम्मू-कश्मीर रियासत के भारत में विलय के बड़े फैसले के लिए जाना जाता है । 1947 में भारत के आजाद होने के बाद हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 में विलय पत्र पर दस्तखत करके जम्मू-कश्मीर रियासत का भारत संघ में विलय किया था ।