कभी वीरान आंखों से घंटों आसमान तकता रहता है तो कभी कुदाल लेकर पत्थरों का सीना तोड़ने लगता है। इन बेजान पत्थरों में ही कहीं उसकी जिंदादिल पत्नी सत्या के अवशेष मिल जाएंगे, यह उम्मीद दो साल में पल भर को भी टूटी नहीं है। किस्सों जैसी यह हकीकत सद्दल गांव के कपूर सिंह की है।
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- फोटो : Amar Ujala
उधमपुर जिले का यह गांव 7 सितंबर 2014 को आए ज़लज़ले में जमींदोज हो गया था। कपूर के कुनबे के सात लोग भी दब गए। छह के शव तो मिल गए, लेकिन कपूर की पत्नी अभी तक नहीं मिली। कपूर की बेमकसद की जिंदगी का इकलौता मकसद अब अपनी सत्या की तलाश ही रह गया है।
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चट्टानों के बीच किसी के खुदाई करने की आवाज सुनाई देती है तो लोग समझ जाते हैं कि यह कपूर ही होगा। यहीं उससे कुछ ही दूरी पर मलबे से पत्थर और लकड़ी हटाता एक और शख्स नजर आता है। यह गिरधारी लाल है।
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खुदाई करते उसे जो सामान मिलता है, वह उसे मवेशियों के लिए बनाए गए शेड में जमा कर लेता है। गिरधारी का भी पूरा परिवार मलबे में दबकर खत्म हो गया। अब वह अकेला है।
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सद्दल की तबाही में 40 जाने गईं। सिर्फ 36 शव खोजे जा सके हैं। तमाम सरकारी एजेंसियों ने हाथ खड़े कर दिए। पीड़ित परिवारों ने भी जहां-तहां आसरा ढूंढ़ लिया, लेकिन, जलजले में पूरा परिवार खो चुके गिरधारी और कपूर ने आखिरी सांस तक गांव न छोड़ने की ठान रखी है।
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- फोटो : Amar Ujala
कपूर सिंह बताते हैं कि उस दिन वह कुछ देर के लिए घर से थोड़ी दूर गए थे। पलक झपकते ही घर और घरवाले मलबे में समा गए। पोते सक्षम और पोती रीतू सहित चार शव दूसरे दिन ही मिल गए, दो शव महीनों बाद मिले। इन छह सदस्यों का अंतिम संस्कार हो चुका है।
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पत्नी का शव मिल जाए तो दिल को सुकून मिल जाएगा। एक बेटा बचा है, उसके सहारे जिंदगी कट जाएगी। 47 वर्षीय गिरधारी ने बताया कि वह श्री माता वैष्णो देवी मार्ग पर पिट्ठू का काम करता है। घर आए तीन दिन ही हुए थे कि त्रासदी हो गई।
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उस दिन घर से वह मवेशी बांधने पशु बाड़े तक पहुंचा और आंखों के सामने ही उनका घर पहाड़ के मलबे में समा गया। पत्नी लीला देवी, बेटी राधा, शारदा, बेटा काकू राम और देवक कुमार सब खत्म हो गए। लंबे समय तक खुदाई करने के बाद सभी शव मिल गए। अब उनका सामान खोज रहे हैं।
सरपंच रमेश सिंह कहते हैं कि जब तक सभी चार शव नहीं मिल जाते पूरे गांव को सुकून कैसे मिलेगा। प्रशासन को मशीन भेजकर फिर से खुदाई करवानी चाहिए। सभी शव मिलने के बाद गांव में स्मारक बनवाया जाना चाहिए।