1965 की जंग में पाकिस्तान जिन पैटन टैंको को लेकर भारत पर विजय का सपना देख रहा था, उन टैंको को भारत की सेना के जांबाज सैनिकों ने अपने हौसलों के बल पर बर्बाद कर दिया ।
कई टैंको पर भारतीय सेना का कब्जा हो गया जो ये बताने की नजीर हैं कि भारतीय सेना का जज्बा कितना बुलंद था । आज जम्मू-कश्मीर में रखे ये टैंक भारतीय सेना के शौर्य की कहानियों को कैसे बयान करते है- देखें तस्वीरों में ।
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पाकिस्तानी टैंक
- फोटो : Amar Ujala
1965 की जंग में पाकिस्तानी सेना की पैटन और शेरमॉन टैंकों के हमले को नाकाम कर भारतीय सेना ने बड़ी कामयाबी हासिल की थी। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद टैंकों की सबसे बड़ी लड़ाई मानी जाती है।
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पाकिस्तानी टैंक
- फोटो : File Photo
पाकिस्तान का मानना था कि युद्ध में उसके दो सौ टैंक प्रयोग हुए, जबकि न्यूट्रल एजेंसी की मानें, तो पाकिस्तान के 300 के करीब टैंक थे। इनमें से ज्यादातर को वीर सपूतों ने नष्ट कर दिए, तो कुछ पर कब्जा जमा लिया।
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पाकिस्तानी टैंक
- फोटो : Amar Ujala
पंजाब के तरन तारन जिले में असल उत्तर, खेमकरण सेक्टर में टैंकों की भयावह लड़ाई हुई। भारत की तरफ से जनरल गुरबख्श सिंह कमान संभाल रहे थे। यह युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध की कुर्सक(बर्फ वाला क्षेत्र) की लड़ाई के मुकाबले मानी जाती है, जिसे बैटल आफ ग्रेवियार्ड नाम दिया गया।
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पाकिस्तानी टैंक
- फोटो : Amar Ujala
छह से दस सितंबर के बीच युद्ध भीषण रूप धारण कर चुका था। इस दौरान दुश्मन के 170 टैंक तबाह कर दिए गए। अकेले अब्दुल हमीद (4 ग्रेनेडियर) ने पाकिस्तान के सात पैटन टैंक नष्ट कर डाले।
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पाकिस्तानी टैंक
- फोटो : Amar Ujala
पाकिस्तान का एक आर्मी डिवीजन अमृतसर की ओर बढ़ रहा था, जिसे रोकना आसान नहीं था। इसलिए उसे दलदल वाले गन्ने के खेतों की तरफ जाने के लिए मजबूर किया गया।
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पाकिस्तानी टैंक
- फोटो : Amar Ujala
साथ ही भारतीय फौज ने नहर का पानी छोड़ दिया। यह घोड़े की नाल की तरह का रास्ता था, जिसमें पाकिस्तानी सेना फंस चुकी थी। आखिर में वह अपने टैंक छोड़ कर भागने पर मजबूर हुई।
1965 की जंग में टैंकों की दूसरी बड़ी लड़ाई चाविंडा क्षेत्र (पंजाब) में 18-19 सितंबर को लड़ी गई। इसमें पाकिस्तान के लगभग 50 टैंक भारतीय सेना ने नष्ट कर डाले। इस हमले में पाकिस्तानी सेना ने नई 22 कैवलरी के टैंक लगाए गए थे।