सेना के 15 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रता साहा द्वारा बुधवार को करीब चार माह बाद श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-1डी) को यातायात के लिए खोला गया।
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PICS: छह महीने बाद खुला भारत का सबसे खतरनाक हाइवे
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434 किलोमीटर लंबा यह राजमार्ग इकलौता रास्ता है, जो कश्मीर को लद्दाख, कारगिल, जंस्कार आदि से जोड़ता है। (फोटो-अमृतपाल सिंह बाली)
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इस मौके पर साहा ने बॉर्डर रोड आर्गेनाईजेशन (प्रोजेक्ट बीकन और विजयक) को राजमार्ग को समय पर खोलने और इस वर्ष सामान्य से ज्यादा देर तक रास्ता खुला रखने के लिए उनके कार्य की सराहना की।
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उन्होंने कहा कि कश्मीर और लद्दाख के बीच संपर्क में सुधार लाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें श्रीनगर-सोनमर्ग-गुमरी की सड़क की चौड़ाई में बढ़ोतरी के साथ-साथ गगनगीर/जेड मोड़ की 6.5 किलोमीटर लंबी टनल के अलावा जोजिला की 14.10 किलोमीटर लंबी टनल शामिल हैं।
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जोजिला पास पर अभी भी करीब 10 फीट बर्फ है। अमर उजाला से बात करते हुए आर्गेनाईजेशन के चीफ इंजीनियर ब्रिगेडियर आशीष कुमार दास ने बताया कि इस राजमार्ग की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि भारी बर्फबारी होने के कारण हर वर्ष यह रास्ता करीबन छह महीने के लिए बंद हो जाता है।
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इससे लद्दाख का देश के बाकी हिस्सों से संपर्क टूट जाता है। 108 किलोमीटर लंबे रास्ते को खोलने की जिम्मेदारी आर्गेनाईजेशन की होती है। ब्रिगेडियर दास के अनुसार इस रास्ते पर 18 मार्च 2015 से बर्फ हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया था और मई के पहले हफ्ते में साफ कर दिया गया था।
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उन्होने बताया कि सामान्य स्थिति के दौरान यह रास्ता नवंबर अंत में बंद हो जाता है, लेकिन इस बार वह इसे 12 जनवरी 2015 तक खुला रखने में कामयाब रहे। ब्रिगेडियर ने बताया कि बर्फ हटाने के लिए डी-50 डोजर, डी-80 डोजर प्रयोग में लाया जाता है।
कारगिल के मोहम्मद हुसैन ने बताया कि यह एकलौता राजमार्ग है, जो लेह को देश के अन्य राज्यों से जोड़ता है। करीब 500 गाड़ियां श्रीनगर से लेह को रवाना की गईं। यह रास्ता कारगिल और लेह की लाइफ-लाइन है। सेना भी इसे सुरक्षा के लिहाज से अहम मानती है।