जम्मू-कश्मीर में मौसम का मिजाज बदलने से पारे में गिरावट आई है। घाटी के कुपवाड़ा और सोनमर्ग के पर्वतीय इलाकों में हल्की बर्फबारी हुई है। गुरुवार की रात हुई बारिश और ओलावृष्टि से ठंडक का अहसास हुआ है। पिछले चौबीस घंटे में जम्मू-कश्मीर के अधिकतर हिस्सों में बारिश हुई है। इस बीच न्यूनतम 1.4 डिग्री सेल्सियस पारे के साथ गुलमर्ग सबसे ठंडा रहा। मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के अनुसार शनिवार को भी जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों में बारिश के आसार हैं।
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बर्फबारी
- फोटो : अमर उजाला
जम्मू में पिछले चौबीस घंटे में 18.8 मिलीमीटर बारिश हुई है। हालांकि शुक्रवार को जम्मू में दिनभर बादल छाए रहे। कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई। बारिश के साथ ठंडक ने दस्तक दी है। इससे बाजारों में खरीदारों की रौनक पर भी असर दिखा। जम्मू में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 3.2 डिग्री गिरकर 27.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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बर्फबारी
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बीती रात का न्यूनतम तापमान भी सामान्य से गिरकर 16.5 डिग्री तक पहुंच गया है। श्री माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटड़ा में 18.0 मिलीमीटर बारिश के साथ दिन का पारा सामान्य से 2.3 डिग्री गिरकर 25.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में बीती रात से सुबह तक कई हिस्सों में बारिश हुई। यहां दिन का पारा सामान्य से 4.5 डिग्री गिरकर 16.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कश्मीर के अधिकतर जिलों में दिन का तापमान सामान्य से 5-9 डिग्री तक गिर गया है।
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बारिश, ओलावृष्टि से बासमती को नुकसान
गुरुवार देर रात तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि ने तैयार हो रही बासमती को खासा नुकसान पहुंचाया है। इस समय मिंजर में दाना लगने की प्रक्रिया हो रही थी। लेकिन बेमौसम बारिश और तेज हवा से फसल खेत में लेट गई। अब इस फसल का दोबारा खड़ा हो पाना मुमकिन नहीं है। पैदावार पर असर पड़ने से बासमती के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, कई तैयार सब्जियों को भी नुकसान हुआ है।
स्कास्ट जम्मू के शोध निदेशक डॉ. जेपी शर्मा के अनुसार इस समय बासमती की फसल तैयार हो रही है। जम्मू संभाग में आरएस पुरा, बिश्नाह, अखनूर, हीरानगर, कठुआ आदि नहरी इलाकों में बासमती का उत्पादन किया जाता है। इस मौसम में बासमती में दाने लगने की प्रक्रिया शुरू होती है, इसके लिए फसल खड़ी रहती है। इसे धान की मिल्की स्टेज भी कहा जाता है। लेकिन ओलावृष्टि और तेज बारिश से मिंजर बैठ गई है, जिससे बासमती के उत्पादन पर असर पड़ेगा। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में बासमती को 30-70 फीसदी तक नुकसान हो सकता है। जम्मू संभाग में 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बासमती की फसल लगाई जाती है। इस समय तैयार सब्जियों में पालक और गोभी की फसल को भी नुकसान पहुंचा है।