दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग में आतंकी हमले में शहीद एसएचओ अरशद खान काफी जांबाज थे। आतंकियों की गोली लगने के बाद भी वे बहादुरी के साथ मोर्चा संभाले रहे जब तक कि आतंकी मारा नहीं गया। जान की परवाह न करते हुए आतंकियों से मुकाबला करने वाले अरशद के साथियों को यकीन नहीं हो रहा है कि अब वह उनके बीच नही हैं। सोमवार को श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी और राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार सहित प्रदेश के सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने आखरी सलामी देते हुए श्रद्धांजलि दी।
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शहीद एसएचओ अरशद खान
- फोटो : अमर उजाला
अनंतनाग में मुठभेड़ के दौरान बख्तरबंद गाड़ी से निकलते ही आतंकी की ओर से चलाई गई गोली से घायल होने के बाद भी एसएचओ अरशद अहमद खान अपनी राइफल से लगातार गोलीबारी करते रहे।
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शहीद एसएचओ अरशद खान को श्रद्धांजलि देते प्रशासनिक अधिकारी
- फोटो : ANI
गत बुधवार को शाम 4.51 बजे सीआरपीएफ के गश्ती दल पर हमले के पांच मिनट के भीतर अनंतनाग के सदर थाने के एसएचओ खान मौके पर पहुंच गए थे। जैसे ही वह अपनी बख्तरबंद गाड़ी से अपनी राइफल के साथ निकले तो आतंकवादी ने उन पर गोलियां चला दी। एक गोली उनकी राइफल के बट से टकराकर उनके लिवर और छोटी आंत में घुस गई। इसके बावजूद अधिकारी ने गिरने से पहले आतंकवादी पर लगातार गोलीबारी की।
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शहीद एसएचओ अरशद खान
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
घायल होने के बाद सैन्य अस्पताल में भर्ती एसएचओ का कुशल क्षेम पूछने के लिए लगातार लोग पहुंचते रहे। पूरा महकमा उनकी सलामती की दुआ करता रहा। उन्हें उम्मीद थी कि वह जिंदगी की जंग भी जीत लेंगे, लेकिन रविवार को दोपहर बाद उनके समक्ष बुरी खबर पहुंची।
पुलिस विभाग ने ड्यूटी के दौरान उनके बलिदान के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की है। परिवार में अभिभावकों के अलावा पत्नी नीलोफर तथा मासूम बच्चे अबुहान खान (5) व दानिम खान (2) हैं। इसके साथ ही एक अविवाहित बहन भी है।