जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमा पर तैयार हो रही शाहपुर कंडी परियोजना के नवंबर 2022 तक चालू होने की उम्मीद है। यह भारत की आजादी के 75वें वर्ष को चिह्नित करने वाली प्रमुख घटनाओं में से एक होगा। इसका उद्देश्य भारतीय क्षेत्र में रावी नदी के पूरे पानी का उपयोग करना है, जिसका बड़ा लाभ कठुआ जिले को मिलने वाला है। परियोजना के पूरा होने पर जम्मू संभाग का कम सिंचित क्षेत्र जिसे कंडी बेल्ट के रूप में जाना जाता है, वह कंडी के रूप में नहीं जाना जाएगा। ये बातें केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहीं।
उन्होंने कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि (इंडस वॉटर ट्रीटी) को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था। इसके तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों व्यास, रावी और सतलुज के पानी पर नियंत्रण दिया गया, जबकि पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों सिंधु, चिनाब और झेलम पर नियंत्रण दिया गया। भारत के हिस्से की रावी नदी का पानी पाकिस्तान में बहता रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप ने इस विसंगति को ठीक करने का काम किया और सही मायनों में सिंधु जल संधि पर काम शुरू हो पाया है।