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आतंकियों की नई साजिश ‘स्टिकी बम': सुरक्षाबलों की इस सलाह को भूलकर भी नजरअंदाज न करें

Sun, 07 Mar 2021 06:19 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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sticky bomb - फोटो : सोशल मीडिया
सुरक्षाबलों को संदेह है कि घाटी में स्टिकी बम आ चुके हैं। इसी आशंका के चलते मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को नए सिरे से तैयार करना शुरू कर दिया गया है। सुरक्षाबलों ने आम जनता को सलाह दी है कि वे अपने वाहनों को लावारिस न छोड़ें। यह जानकारी अधिकारियों ने रविवार को दी। बता दें कि जम्मू-कश्मीर के सांबा में पिछले महीने आईबी पर मिली 14 आईईडी में मैगनेट लगाया गया था ताकि इनको वाहनों के साथ चिपका दिया जाए और जब चाहे टाइमर लगाकर रिमोट से विस्फोट कर दिया जाए। इन्हें स्टिकी बम कहा जाता है और दहशतगर्दों की यह तकनीक जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के नए आगाज का संकेत है। जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरे की घंटी है और एक बड़ी चुनौती भी।

 
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आईईडी - फोटो : अमर उजाला
दरअसल, कश्मीर में आईईडी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट थीं और इसी सतर्कता के चलते यह बम बरामद किए गए थे। सांबा में छह पिस्टल और 14 आईईडी फेंकी गई थी। इन आईईडी में मैगनेट लगा रखा था। ताकि इनको वाहनों पर चिपका दिया जाए और इसको टाइमर के तौर पर इस्तेमाल किया जाए। साथ ही रिमोट से उड़ा दिया जाए। यह आईईडी नई आतंकी तंजीम रजिस्टेंस फोर्स (आरटीएफ) के लिए थी।
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आईईडी - फोटो : अमर उजाला
अब तक मैगनेट लगी आईईडी (स्टिकी बम) अफगानिस्तान और इराक में इस्तेमाल होती रही है। भारत में इसका इस्तेमाल 2012 में हुआ था। ईरानी आतंकियों ने इसे इजराइल डिप्लोमेट की कार के साथ लगाया था और इसमें उनकी पत्नी घायल हो गई थी।

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एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सुरक्षाबलों के काफिले को इस तरह की तकनीक से बचाना होगा। काफिले की सुरक्षा को नए सिरे से पुख्ता करने की आवश्यकता है।

 
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पुलवामा आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो
दो साल पहले आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ने कश्मीर में पुलवामा के पास सीआरपीएफ काफिले को आईईडी से उड़ा दिया था। अब फिर से आईईडी का ऐसा इस्तेमाल घातक साबित हो सकता है। बता दें कि मैगनेट लगाकर आईईडी लगाने का काम द्वितीय युद्ध में ब्रिटिश फोर्स ने इस्तेमाल किया था।
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