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जम्मू-कश्मीरः एमएलए हॉस्टल पहुंचे नेताओं के परिजन, यहीं नजरबंद हैं घाटी के 34 राजनीतिक बंदी

Wed, 20 Nov 2019 02:02 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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एमएलए हॉस्टल पहुंचे नजरबंद नेताओं के रिश्तेदार - फोटो : बासित जरगर
अनुच्छेद 370 हटने के बाद तीन महीने से अधिक समय से नजरबंद नेताओं से बुधवार को उनके परिजन मिलने पहुंचे। इस दौरान एलएलए हॉस्टल व आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों की तैनाती रही। बता दें कि सेंटूर होटल में बंद 34 राजनीतिक बंदियों को रविवार को एलएलए हॉस्टल में शिफ्ट किया गया था। कड़ाके की ठंड पड़ने की वजह से डल झील किनारे स्थित इस होटल से इन्हें शिफ्ट करने का फैसला लिया गया था।
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एमएलए हॉस्टल पहुंचे नजरबंद नेताओं के रिश्तेदार - फोटो : बासित जरगर
इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को शुक्रवार को जबरवान रेंज की पहाड़ियों पर स्थित चश्मा शाही से शहर में एक सरकारी आवास में भेजा गया था। उनकी बेटी इल्तिजा ने ठंड को देखते हुए शिफ्ट करने की मांग की थी। अधिकारियों ने बताया कि शिफ्टिंग से पहले एमएलए हॉस्टल में आवश्यक मरम्मत कार्य तथा जरूरी इंतजामात कराए गए।
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एमएलए हॉस्टल पहुंचे नजरबंद नेताओं के रिश्तेदार - फोटो : बासित जरगर
इसके साथ ही गृह विभाग की ओर से इसे अस्थायी जेल घोषित करने का आदेश जारी किया गया। सर्दी की वजह से नेशनल कांफ्रेस, पीडीपी, पीपुल्स कांफ्रेंस के नेताओं, प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा उनकी सुरक्षा में लगे जवानों की सेहत पर असर पड़ रहा है। श्रीनगर समेत कश्मीर घाटी में सर्द हवाएं चल रही हैं।

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एमएलए हॉस्टल पहुंचे नजरबंद नेताओं के रिश्तेदार - फोटो : बासित जरगर
इस महीने की शुरूआत में मौसम की पहली बर्फ बारी हुई। नवनिर्मित केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन शीतकाल के लिए श्रीनगर से जम्मू स्थानांतरित हो गया है। इन राजनीतिक बंदियों में पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद गनी लोन, नेशनल कांफ्रेंस के अली मोहम्मद असगर व मुबारक गुल, पीडीपी के नईम अख्तर व निजामुद्दीन भट और पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल शामिल हैं। 
 
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एमएलए हॉस्टल पहुंचे नजरबंद नेताओं के रिश्तेदार - फोटो : बासित जरगर
तलाशी के बाद हॉस्टल में हुए दाखिल, हंगामा
राजनीतिक बंदियों को तीन शिफ्ट में कड़ी सुरक्षा के बीच एमएलए हॉस्टल भेजा गया था। हॉस्टल में कड़ी तलाशी ली गई थी। यह चेक किया गया कि कहीं उनके पास मोबाइल फोन या अन्य सामान तो नहीं हैं। इसको लेकर बंदियों ने हंगामा भी किया था। इनका कहना था कि राजनीतिक लोगों की तलाशी लेना उचित नहीं है। 
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