रमजान
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रमजान में इतनी सारी नियमतें हैं, जो सामान्य दिनों में कम ही मिलती हैं। खानपान में अच्छी-अच्छी चीजें होती हैं। इस माह में पढ़ा गया एक-एक शब्द आखिरत के लिए भी महत्व रखता है। यानी एक रुपया भी अगर किसी को इस माह मुबारक में दिया गया, तो उसका पुण्य अल्लाह 70 गुना देता है। ऐसे में जब यह माह हमसे जुदा हो रहा है, तो तकलीफ हो रही है। यही कारण है कि रमजान के आखिरी जुमे को अलविदा की नमाज यह कहते हुए अता की जाती है अगले साल यह महीना उन्हें नसीब होगा भी या नहीं। -मोहम्मद फारूक, नाजिम, दारुल उलूम, बाड़ी ब्राह्मणा