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PICS: जानें माता वैष्णो देवी की गुफा के ये 7 रहस्य, जानकर हर कोई हो जाता है हैरान

Thu, 21 Dec 2017 10:53 PM IST
amarujala.com- Presented by: चंद्रा पाण्डेय
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- फोटो : Amar Ujala
माता वैष्‍णो देवी की गुफा ज‌िसे माता का भवन कहा जाता है इनके बारे में जान‌िए कुछ ऐसी बातें जो आप नहीं जानते होंगे।
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- फोटो : AMAR UJALA
भगवान व‌िष्‍णु के अंश से उत्पन्न मां वैष्णो का एक अन्य नाम देवी त्र‌िकूटा भी है। देवी त्र‌िकूटा यानी मां वैष्‍णो देवी का न‌िवास स्‍थान जम्मू में माणिक पहाड़ियों की त्रिकुटा श्रृंखला में एक गुफा में है। देवी त्र‌िकूटा के न‌‌िवास के कारण माता का न‌िवास स्‍थान त्र‌िकूट पर्वत कहा जाता है।
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vaishno devi - फोटो : Amar Ujala
आपने अगर माता के दरबार में हाज‌िरी लगाई है तो आपको याद होगा क‌ि मां का न‌िवास पर्वत पर एक गुफा में है। भक्तों की लंबी कतार के कारण आपको पव‌ित्र गुफा के दर्शन का काफी कम समय म‌िला होगा इसल‌िए इस गुफा के बारे में कई बातें हैं जो आप नहीं जान पाए होंगे तो चल‌िए आज जानें मां के दरबार की कई रोचक बातें।

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- फोटो : FILE
माता वैष्‍णो देवी के दर्शनों के ल‌िए वर्तमान में ज‌िस रास्ते का इस्तेमाल क‌िया जाता है वह गुफा में प्रवेश का प्रकृत‌िक रास्ता नहीं है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए कृत्र‌िम रास्ते का न‌िर्माण 1977 में ‌‌क‌िया गया। वर्तमान में इसी रास्ते से श्रद्धालु माता के दरबार में प्रवेश पाते हैं।
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मां वैष्णो देवी मंदिर - फोटो : SELF
कुछ क‌िस्मत वाले भक्तों को प्राचीन गुफा से आज भी माता के भवन में प्रवेश का सौभाग्य म‌िल जाता है। दरअसल यह न‌ियम है क‌ि जब कभी भी दस हजार के कम श्रद्धालु होते हैं तब प्राचीन गुफा का द्वार खोल द‌िया जाता है। आमतौर पर ऐसा शीत काल में द‌िसंबर और जनवरी महीने में होता है।
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vaishno devi - फोटो : file photo
प‌व‌ित्र गुफा की लंबाई 98 फीट है। गुफा में प्रवेश और न‌िकास के ल‌िए दो कृत्र‌िम रास्ता बनाया गया है। इस गुफा में एक बड़ा चबूतरा बना हुआ है। इस चबूतरे पर माता का आसन है जहां देवी त्र‌िकूटा अपनी माताओं के साथ व‌िराजमान रहती हैं।
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- फोटो : Amar Ujala
मां माता वैष्णो देवी के दरबार में प्राचीन गुफा का काफी महत्व है। श्रद्धालु इस गुफा से माता के दर्शन की इच्छा रखते हैं। इसका बड़ा कारण यह है क‌ि  प्राचीन गुफा के समक्ष भैरो का शरीर मौजूद है ऐसा माना जाता है। माता ने यहीं पर भैरो को अपनी त्र‌िशूल से मारा था और उसका श‌िर उड़कर भैरो घाटी में चला गया और शरीर यहां रह गया।
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