जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त को अनुच्छेद-370 हटाए जाने के 20 सप्ताह बाद पहली बार शुक्रवार को जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज अता की गई। हालांकि, इस ऐतिहासिक मस्जिद में दोबारा नमाज पढ़ने का सिलसिला बुधवार को ही शुरू हो गया था। लेकिन जुमे की नमाज होने के चलते सभी की निगाहें पर इसी पर लगी हुई थीं। जुमे की नमाज को लेकर नमाजियों में काफी उत्साह देखने को मिला। वहीं कुछ लोगों ने नमाज के बाद केंद्र की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया।
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जामिया मस्जिद श्रीनगर
- फोटो : बासित जरगर
अनुच्छेद 370 हटाने के बाद श्रीनगर समेत पूरी घाटी में प्रशासन ने ऐहतियातन पाबन्दियां लागू की थीं। इसके चलते श्रीनगर के डाउनटाउन के नौहट्टा इलाके में स्थित जामिया मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति भी नहीं थी। बाद में प्रशासन ने औकाफ कमेटी को नमाज पढ़ने की अनुमति दी।
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जामिया मस्जिद श्रीनगर
- फोटो : बासित जरगर
लेकिन कमेटी ने जामिया के आस-पास तैनात सुरक्षा कर्मियों को वहां से हटाने और मस्जिद के शुद्धिकारण के बाद ही वहां नमाज पढ़ने पर फैसला लिया था। करीब 134 दिनों के बाद बीते बुधवार को जामिया की मीनारों से अजान की आवाज गूंजी। इसके बाद शुक्रवार को करीब 20 सप्ताह के बाद जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ी गई।
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जामिया मस्जिद श्रीनगर
- फोटो : बासित जरगर
मस्जिद परिसर के बाहर शांतिपूर्वक प्रदर्शन
जुमे की नमाज के बाद जामिया मस्जिद परिसर के बाहर स्थानीय लोगों ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लेकर राष्ट्र विरोधी और आजादी के हक में नारे लगाए। कश्मीर घाटी में इन्फॉर्मेशन ब्लॉकेज को जल्द हटाने की मांग की। साथ ही कश्मीर और पाक अधिकृत कश्मीर में जम्मू-कश्मीर के लोगों को आत्मनिर्णण का अधिकार दिए जाने की मांग की।
सुरक्षा के कड़े प्रबंध
पहले से तैनात प्रदर्शनों की आशंका को ध्यान में रखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध कर रखे थे। मस्जिद में नमाज पढ़ने जाने वालों को तलाशी के बाद ही अंदर जाने की अनुमति थी। मस्जिद के बाहर भी कड़ी सुरक्षा रखी गई।