जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को बंद करने को लेकर जारी किये गए निर्देश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्या केवल स्कूलों को बंद करने से कोरोना महामारी को फैलने से रोका जा सकता है, क्या पर्यटन स्थलों पर कोरोना नहीं फैलेगा। स्थानीय लोग बड़ी संख्या में कश्मीर में पर्यटकों की आमद को लेकर चिंतित हैं।
विज्ञापन
2 of 5
ट्यूलिप गार्डन में बिना मास्क के लोग
इस बीच जिला प्रशासन के अनुसार पूरी कोशिश की जा रही है कि जमीनी स्तर पर एसओपी को लागू कराया जाए। इसके लिए प्रशासन ने एक हिफाजत प्रोग्राम भी शुरू किया है, जिससे लोगों को जागरूक किया जा रहा है। स्कूलों को बंद करने के निर्देश के बाद सामने आई ट्यूलिप गार्डन की तस्वीरों ने लोगों को सवाल पूछने पर मजबूर कर दिया है।
विज्ञापन
3 of 5
ट्यूलिप गार्डन
- फोटो : Amar Ujala
सूत्रों की मानें तो ट्यूलिप गार्डन में रोजाना 5000 से ज्यादा लोग पहुंच रहे हैं। यहां न कहीं सोशल डिस्टेंसिंग देखने को मिलती है और न ही एसओपी का पालन हो रहा है। मास्क भी बहुत कम लोग पहने दिखाई देते हैं। श्रीनगर उपायुक्त ऐजाज असद ने कहा कि लोगों द्वारा उठाई गई चिंताओं को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया गया है।
4 of 5
घाटी के स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना महामारी से निपटने के लिए प्रशासन अपना काम कर रहा है। लोग इसे केवल सरकार की लड़ाई न समझें यह उनकी जिम्मेदारी भी बनती है कि जो कोविड के प्रोटोकॉल जारी किये गए हैं उनका सख्ती से पालन करें।
उन्होंने कहा कि श्रीनगर प्रशासन ने एक प्रोग्राम की शुरुआत की है जिसका नाम हिफाजत है। इसमें सोशल आउटरीच के तहत लोगों को एसओपी का पालन करने के लिए उनमें जागरूकता फैलाने के लिए सिविल सोसाइटी के वालंटियर्स सामने आए हैं।