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जम्मू-कश्मीर: हर साल 600 लाख किलो मटन खा जाते हैं लोग, कम पड़ने पर दूसरे राज्यों से मंगाना पड़ता है

Sat, 21 Aug 2021 10:06 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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मटन पकाते लोग - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में लगातर मटन की खपत बढ़ रही है। लोग हर साल 600 लाख किलो मटन खा जाते हैं। मांग में बढ़ोतरी के बावजूद इसकी उपलब्धता नहीं बढ़ पा रही। यही कारण है कि आधे से ज्यादा मटन बाहरी राज्यों से प्रदेश में पहुंचता है। पशु एवं भेड़ पालन विभाग की ओर से कुछ योजनाएं उपलब्धता बढ़ाने के लिए शुरू की गई हैैं। 

जानकारी के अनुसार प्रदेश में हर साल 600 लाख किलो मटन की खपत होती है। इसमें से अकेले कश्मीर संभाग में 400 लाख किलो के करीब खपत है, जबकि 600 लाख किलो में स्थानीय उपलब्धता 300 लाख किलो है। बाकी का मटन बाहर से आता है। यहीं कारण है कि कश्मीर में मटन 600 रुपये प्रति किलो और जम्मू में 550 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। जानकारी के अनुसार पिछले 4 सालों में जम्मू-कश्मीर में 130 लाख किलो मटन की खपत बढ़ी है, लेकिन उपलब्धता पहले भी 300 लाख किलो होती थी, जो आज 350 लाख किलो के आसपास है। बाकी की सप्लाई बाहरी राज्यों से आती है।
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मटन पकाते लोग - फोटो : अमर उजाला
जानकारी के अनुसार पशु एवं भेड़ पालन विभाग की ओर इंटीग्रेटेड शीप डेवलपमेंट स्कीम को लागू किया गया है। जिसके माध्यम से इसकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए इसमें उद्यमियों को शामिल करने पर जोर दिया गया है।
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मटन पकाते लोग - फोटो : अमर उजाला
इसके तहत कुछ नई यूनिट स्थापित की गई हैं, जिससे एक हजार लोगों को रोजगार भी प्रदान किया गया है। योजना के तहत लाभार्थियों को निशुल्क भेड़ एवं बकरी दी जाती है।

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मटन पकाते लोग - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद पांच सालों के भीतर इनसे वापस लेकर नई यूनिट स्थपित की जाती है।
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मटन पकाते लोग - फोटो : अमर उजाला
मौजूदा वर्ष में इस योजना के तहत प्रत्येक यूनिट में 10 भेड़ों वाली 882 यूनिट स्थापित की गई हैं। जबकि 25 भेड़ों वाली 201 यूनिट भी स्थापित की गई हैं। इस पर कुल 11 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
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