फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महबूबा बोलीं- चीन से बात हो सकती है तो पाकिस्तान से क्यों नहीं, आडवाणी और मुशर्रफ का किया जिक्र

Sun, 21 Feb 2021 03:46 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
1 of 5
महबूबा मुफ्ती - फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती रविवार को कुपवाड़ा पहुंचीं। श्रीनगर आतंकी हमले में शहीद हुए पुलिस के जवान के परिवार के साथ एकजुटता और सहानुभूति व्यक्त की। इस दौरान एक बार फिर उन्होंने जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली के लिए पाकिस्तान से बात करने की वकालत की। महबूबा ने कहा कि तीस सालों से हमारे लोग शहीद हो रहे हैं। बदकिस्मती ये है कि सरकार टस से मस नहीं हो रही है। चीन हमारी जमीन के अंदर घुस आया फिर भी चीन से बातचीत की गई और मसले का हल निकला।
विज्ञापन

2 of 5
महबूबा मुफ्ती - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर जंग का अखाड़ा बन गया है। हमारे लोग, पुलिस के जवान व अन्य सुरक्षाबलों के जवान मारे जा रहे हैं। बंदूक चाहें आतंकियों की हो या सुरक्षाबलों की, जंग किसी चीज का हल नहीं है। पाकिस्तान से बातचीत के जरिए जम्मू-कश्मीर की समस्या का हल निकाला जाना चाहिए।

 
विज्ञापन

3 of 5
महबूबा मुफ्ती - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि जब-जब पाकिस्तान से बातचीत हुई है, मामले का हल निकला है। इस दौरान उन्होंने लाल कृष्ण आडवाणी का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी मुशर्रफ से बातचीत के बाद जम्मू-कश्मीर में खून खराब काफी कम हो गया था। इस दौर में भी उसी नीति की जरूरत है। 

4 of 5
महबूबा मुफ्ती - फोटो : अमर उजाला
इससे पहले शनिवार को जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भारत सरकार को सोचना चाहिए कि कब तक प्रदेश के लोग ऐसे कुर्बान होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला है जिसका हल निकाला जाना चाहिए। हमारे कब्रिस्तान भर गए हैं। मामले का हल निकालने के लिए पाकिस्तान से बातचीत करनी चाहिए। महबूबा मुफ्ती अनंतनाग जिले के लोगरीपोरा ऐशमुकाम इलाके में शहीद कांस्टेबल सुहैल अहमद के घर गईं, जहां परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
महबूबा मुफ्ती - फोटो : अमर उजाला
महबूबा ने केंद्र सरकार से पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ संवाद करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सोचना चाहिए कि आखिकार कब तक जम्मू-कश्मीर के लोग, उसके पुलिस कर्मी, अन्य सुरक्षाबल एवं युवा अपने जान की कुर्बानी देते रहेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें