पुंछ जिले के मेंढर सब डिवीजन की भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा से सटी तहसील बालाकोट में बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल पहुंचे ही थे कि पाकिस्तानी सेना ने मोर्टारों से गोलाबारी शुरू कर दी। इस दौरान कई गोले स्कूलों के आसपास आकर गिरने लगे। इनके धमाकों से बच्चे रोने और चीखने लगे। दूसरी तरफ अभिभावक भी बच्चों की जान पर मंडरा रहे खतरे को देखकर बेचैन हो गए।
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पाक की गोलाबारी के बीच बच्चों को स्कूल से रेस्क्यू करती सेना
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार सुबह को सीमापार से की जा रही इलाके में गोलाबारी के बीच अभिभावक बच्चों को स्कूल से वापस लाने का प्रयास करने लगे। मगर, लगातार बढ़ रही गोलाबारी के चलते माता-पिता स्कूल तक नहीं पहुंच पाए। इसकी जानकारी सेना को मिली। इसके बाद जवान पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच स्कूलों में फंसे बच्चों को लाने के लिए बुलेटप्रूफ बख्तरबंद कैस्पर गाड़ियों के साथ रवाना हो गए। वहां पहुंचकर स्कूलों में फंसे बच्चों को गाड़ियों में बिठा कर गोलाबारी के बीच उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचा।
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पाक की गोलाबारी में हुआ नुकसान
- फोटो : अमर उजाला
जैसे ही बच्चे अपने घरों के पास पहुंचे तो वह खुशी से दूर से ही चिल्लाने लगे अम्मी-अब्बू हम आ गए... हम आ गए... और बच्चों को देख कर उनके माता पिता के चेहरे भी खिल गए। सेना के इस काम के लिए बच्चों के माता-पिता जवानों और अधिकारियों को दुआएं देने लगे।
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पाक की गोलाबारी में हुआ नुकसान
- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के अनुसार सेना की तरफ से जिस दौरान स्कूलों से बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए अभियान चलाया जा रहा था। उस दौरान पाकिस्तानी सेना की जोरदार गोलाबारी कर रही थी। बावजूद सेना ने उस समय उसका जवाब हलके अंदाज में दिया। जैसे ही जवानों ने स्कूलों में फंसे बच्चों को सुरक्षित उनके घरों में पहुंचाने का काम पूरा किया। इसके बाद सेना ने पाकिस्तानी गोलाबारी का दोगुनी ताकत से जवाब देना शुरू कर दिया। इसके बाद दोपहर डेढ़ बजे पाकिस्तानी सेना ने गोलाबारी बंद कर दी।
तुरंत नुकसान का जायजा लेने पहुंचे एसडीपीओ मेंढर
शनिवार को पाकिस्तानी सेना की तरफ से जिले के बालाकोट में भारी गोलाबारी कि गई। इसमें काफी नुकसान हुआ। जैसे ही गोलाबारी थमी को एसडीपीओ मेंढर नीरज पडियार पुलिस दल के साथ जायजा लेने के लिए नियंत्रण रेखा से सटे गई गांव के दौरे पर पहुंच गए। जहां उन्होंने गोलाबारी में जिन घरों, दुकानों, पशुशालाओं और वाहनों को नुकसान पहुंचा। वहां हर एक स्थान पर पहुंच कर न सिर्फ नुकसान का जायजा लिया। बल्कि पीड़ित लोगों से मुलाकात कर उनको सांत्वना देने के साथ उनके नुकसान को जिला प्रशासन तक पहुंचा कर नुकसान का मुआवजा दिलवाने का आश्वासन भी दिया। एसडीपीओ के गोलाबारी थमने के तुरंत बाद गोलाबारी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने पर पीड़ितों का कहना था कि अधिकारियों के हमारे दुख में शामिल होने से उनका मनोबल बढ़ जाता है।