कारतूस दिखाते बच्चे
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गोलों के धमाके से बच्चे डर जाते हैं। धमाकों के बाद बच्चों का रोना चिल्लाना हमें यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि बॉर्डर पर रहकर हमने कौन सा पाप कर दिया है। चक चंगा गांव की रत्नो देवी ने बताया गांव में जब रात को गोलाबारी हुई तो एक गोली घर की दीवार पर आ लगी। जोरदार आवाज हुई और घर के सभी लोग सहम गए। बंकर घर से दूर था इसलिए एक ही कमरे में बिस्तर बिछाकर लेट गए। इसी दौरान बच्चों ने चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया। हर धमाके के बाद बच्चे जोर से चिल्लाते रहे। इस तरह की जिंदगी से अब हम परेशान हो चुके हैं। हमें किसी सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए, जहां हम सुकून से रह सकें और हमारे बच्चे शांत वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सकें।