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बॉर्डर पर बसे लोगों का छलका दर्द, बोले- ऐसा महसूस होता जैसे कोई गुनाह कर दिया हो हमने

Thu, 20 Aug 2020 05:27 PM IST
प्रशांत कुमार अरुण खजूरिया, हीरानगर-कठुआ
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पाकिस्तानी गोलाबारी से चक चंगा गांव में भारी नुकसान - फोटो : अमर उजाला
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान बार-बार सीजफायर का उल्लंघन कर रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर गोलाबारी कर रहा है। इससे सीमा से सटे गांवों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही पाकिस्तान गोलाबारी शुरू कर देता है। रिहायशी इलाकों पर भी जमकर गोलाबारी करता है। धमाकों के बाद जब बच्चे जोर-जोर से चिल्लाते हैं तो ऐसा महसूस होता है कि हमने बॉर्डर पर बस कर कोई पाप कर दिया हो। गोलाबारी के कारण खून पसीने की कमाई से बनाए कई घरों का नुकसान हो चुका है।
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पाकिस्तानी गोलाबारी से चक चंगा गांव में भारी नुकसान - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार रात को पाकिस्तान की ओर से की गई भारी गोलाबारी से चक चंगा गांव के कई घरों को नुकसान पहुंचा। इसी गांव के बीचो-बीच बने एक मंदिर पर भी पाकिस्तानी रेंजर्स ने कई गोलियां दागीं। कुछ गोलियां मंदिर की दीवार भेद कर भीतर लगीं। मदन लाल माथुर के घर की छत पर मोर्टार शेल गिरने से छत और पानी की टंकी को नुकसान हुआ हुआ। गांव के करीब आधा दर्जन घरों की दीवारों पर कई गोलियां लगी हैं।
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पाकिस्तानी गोलाबारी से चक चंगा गांव में भारी नुकसान - फोटो : अमर उजाला
बालकृष्ण के घर की दीवारों में गोलियां लगने से दरार आ गई है। कुछ घरों में मुख्य दरवाजों पर भी गोलियां लगीं। गनीमत यह रही कि किसी तरह का जानी नुकसान नहीं हुआ। गौरतलब है कि पाकिस्तान सीमा पर चल रहे सुरक्षा बांध के कार्य को बाधित करने के लिए प्रतिदिन रात को गोलाबारी कर रिहायशी इलाकों को निशाना बना रहा है।

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पाकिस्तानी गोलाबारी से चक चंगा गांव में भारी नुकसान - फोटो : अमर उजाला
हमारा हाल जानने कोई नहीं आता। हमें प्रशासन और सरकार ने हमारे हालातों पर ही छोड़ दिया है। हम कैसे यहां दिन गुजार रहे हैं ये सिर्फ हम ही जानते हैं। न तो दिन को चैन है और न ही रात को नींद। सीमा पर गोलाबारी हमारे लिए नासूर बन गई है। अब हम यह परेशानी और नहीं बर्दाश्त कर सकते। बेहतर होगा सरकार पाकिस्तान पर कोई बड़ी कार्रवाई करे और हमें इससे छुटकारा दिलाए। अगर सरकार ऐसा नहीं कर सकती तो हमें यहां से पलायन करना पड़ेगा। -नानक चंद, चक चंगा निवासी।
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पाकिस्तानी गोलाबारी से चक चंगा गांव में भारी नुकसान - फोटो : अमर उजाला
गोलाबारी के दौरान रात डरकर और जागकर गुजारते हैं। गोलाबारी का सबसे ज्यादा असर हमारी पढ़ाई पर पड़ रहा है। हम सही ढंग से पढ़ाई भी नहीं कर पा रहे हैं। शाम ढलते ही गोलाबारी शुरू होने का डर बना रहता है। हमारी सुरक्षा के लिए बनाए गए बंकरों में भी पानी भर गया है। ऐसे में न तो हम घरों में सुरक्षित हैं और न ही बंकरों में। सरकार को हमारे भविष्य की चिंता करते हुए इस समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए। -शिक्षा माथुर, चक चंगा।

 

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कारतूस दिखाते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
गोलों के धमाके से बच्चे डर जाते हैं। धमाकों के बाद बच्चों का रोना चिल्लाना हमें यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि बॉर्डर पर रहकर हमने कौन सा पाप कर दिया है। चक चंगा गांव की रत्नो देवी ने बताया गांव में जब रात को गोलाबारी हुई तो एक गोली घर की दीवार पर आ लगी। जोरदार आवाज हुई और घर के सभी लोग सहम गए। बंकर घर से दूर था इसलिए एक ही कमरे में बिस्तर बिछाकर लेट गए। इसी दौरान बच्चों ने चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया। हर धमाके के बाद बच्चे जोर से चिल्लाते रहे। इस तरह की जिंदगी से अब हम परेशान हो चुके हैं। हमें किसी सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए, जहां हम सुकून से रह सकें और हमारे बच्चे शांत वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सकें।
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