जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में पाकिस्तान ने शुक्रवार को भी भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर सीजफायर का उल्लंघन किया। इस दौरान पाकिस्तान की तरफ से करमाड़ा गांव पर दागा गया एक मोर्टार वार्ड चार के मोहल्ला बार्डर निवासी नजीर अहमद के मकान की दीवार तोड़ कर अंदर घुस गया। घर के अंदर मोर्टार फटने से नजीर और उसे छोटे भाई का परिवार बाल-बाल बचा।
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पाकिस्तान द्वारा की गई मोर्टार शेलिंग
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को पाकिस्तानी सेना की तरफ से पुंछ के करमाड़ा गांव को निशाना बना कर दागा गया एक मोर्टार नजीर अहमद के घर की दीवार तोड़ जोरदार धमाके के साथ फट गया। अचानक मोर्टार का धमाका होने से कमरे में बच्चों के साथ मौजूद नजीर अहमद की छोटी भाभी शमीम अख्तर बेहोश हो कर गिर गईं। करीब दो घंटे बाद उनको होश आया। घटना के बारे में नजीर अहमद का कहना था कि पाकिस्तानी सेना की चौकियां उनके गांव से डेढ़-दो सौ मीटर की दूरी पर हैं। पाकिस्तानी सेना हर सुबह-शाम, दिन-रात जब मन में आता है उनके गांव को निशाना बनाकर गोलीबारी शुरू कर देती है। इससे ग्रामीणों को बचने का मौका तक नहीं मिलता है।
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पाक की गोलाबारी के बाद सीमा पर हलचल
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार की सुबह करीब 9 बजे जब पाकिस्तानी सेना ने उनके घर को निशाना बनाया तो मोर्टार उनके घर की आरसीसी की बनी दीवार तोड़ कर अंदर आ गिरा। इस घटना में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि आरसीसी की दीवार होने से मोर्टार दीवार से टकराते ही फट गया। यदि दीवार मजबूत न होती तो मोर्टार अंदर आकर फटता। ऐसे में कमरे में मौजूद उनके परिवार के पांच-छह लोगों की मौत हो सकती थी।
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पाकिस्तान द्वारा दागा गया मोर्टार
- फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तानी गोलाबारी के समय मौजूद शमीम अख्तर का कहना था कि जब गोला आकर दीवार से लगा तो बड़ा जोरदार धमाका हुआ। पूरा कमरा धूल और धुएं से भर गया। उनको बाहर भागने के लिए दरवाजा भी नजर नहीं आया, इससे वे बेहोश होकर गिर गईं।
पाकिस्तान द्वारा की गई मोर्टार शेलिंग में दीवार टूटी
- फोटो : अमर उजाला
सामुदायिक बंकर में भरा पानी, कहां जाकर बचाएं जान
शमीम और नजीर अहमद का कहना था कि पाकिस्तानी सेना की चौकियां एकदम सामने होने से वे उनके सामने हमेशा मौत मडराती रहती है। उन्होंने बताया कि उनके मोहल्ले में पिछले साल ही प्रशासन ने एक सामुदायिक बंकर बनवाया था जो पानी से भरा हुआ है। गोलाबारी के समय वह हमारे किसी काम का नहीं है। इसलिए प्रशासन को करमाड़ा के हर ग्रामीण के घर के पास एक-एक बंकर बनवाना चाहिए। बंकर चाहे छोटा ही हो, लेकिन उससे कम से कम उनके परिवार की जान तो बच जाएगी।