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Pahalgam Attack: मैदान में लोगों को इकट्ठा किया... फिर आतंकियों ने बरसाईं गोलियां, हमले का नया वीडियो; देखें

Thu, 24 Apr 2025 01:00 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला, न्यूज डेस्क, नोएडा

सार

पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में मैदान पर कुछ लोग बैठे हैं, जबकि उनके पास एक आतंकी खड़ा है। देखते ही देखते गोलियां चलने लगती हैं। वायरल वीडियो की अमर उजाला पुष्टि नहीं करता है। 
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Pahalgam Terror Attack - फोटो : वीडियो ग्रैब
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकी हमले का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में एक आतंकी पहलगाम के मैदान में पर्यटकों पर हमला करते देखा जा सकता है। चीखने-चिल्लाने की आवाज भी वीडियो में आ रही है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वीडियो में ज्यादा साफ नहीं दिखाई दे रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि पहलगाम के मैदान में कुछ लोग बैठे हैं। वहां एक संदिग्ध हाथ में हथियार लिए दिखाई दे रहा है। मंगलवार को हुए हमले में आतंकियों ने 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी। जबकि 14 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। 

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वायरल वीडियो से लिया गया - फोटो : वीडियो ग्रैब
पहलगाम ग्राउंड में आतंकी पर्यटकों पर हमला करते देखा जा सकता है। पर्यटक नीचे बैठे हैं और आतंकी खड़ा है। पहले लोगों को इकठ्ठा भी किया गया। इसके बाद गोलियों से भून दिया। वायरल वीडियो की अमर उजाला पुष्टि नहीं करता है। जांच में यह जानकारी सामने आई है कि आतंकियों ने जानबूझकर पहलगाम को ही हमले के लिए चुना था। यहां पर सुरक्षाबलों की तैनाती नहीं है। आतंकियों ने छिपने के लिए पीर पंजाल के घने जंगल में ठिकाने बना लिया। 
 
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हमले के बाद सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला
जानकारी के अनुसार, पहलगाम के बायसरन में हुए हमले पांच से सात आतंकवादियों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, इन आतंकियों ने पाकिस्तान में प्रशिक्षण हासिल किया। इन्हें दो स्थानीय आतंकवादियों से भी मदद मिली। उपलब्ध सबूतों के आधार पर अधिकारियों ने बताया कि मृतक पर्यटकों में से एक की पत्नी की ओर से की गई पहचान के आधार पर बिजबेहरा निवासी आदिल थोकर उर्फ आदिल गुरी की भूमिका सामने आई है। 

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हमले के बाद सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला
अधिकारियों का मानना है कि आदिल थोकर 2018 में पाकिस्तान गया था। वहां उसने प्रतिबंधित लश्कर-ए-ताइबा (एलईटी) आतंकवादी संगठन के साथ सशस्त्र प्रशिक्षण लिया और फिर हमलों को अंजाम देने के लिए भारत में घुसपैठ की। अधिकारियों ने बताया कि प्रत्यक्षदर्शियों को कम से कम छह से सात तस्वीरें दिखाई गई। इनमें से एक में आदिल की पहचान उस आतंकवादी के रूप में हुई, जो गोली चला रहा था। उन्होंने बताया कि घटना के बाद आतंकवादी पीर पंजाल के घने देवदार के जंगलों में गायब हो गए।
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हमले के बाद सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला
आतंकी बॉडी कैमरा लगाए थे 
अधिकारियों ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि आतंकवादी अपने बर्बर कृत्य को रिकॉर्ड करने के लिए बॉडी कैमरा लेकर आए थे। जांच से पता चला है कि मंगलवार को बायसरन मैदान में चार आतंकवादियों ने पर्यटकों को पंक्तिबद्ध कर नजदीक से गोलियां चलाई। वहीं कम से कम एक से तीन आतंकवादी निकटवर्ती सुरक्षाबलों पर नजर रखने के लिए रणनीतिक रूप से तैनात थे। 
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पहलगाम अटैक के संदिग्ध आतंकियों के स्केच जारी - फोटो : एजेंसियों ने जारी किया
तीन हमलावर दरिंदों का स्केच जारी 
पहलगाम में जिन तीन आतंकियों ने भयावह हमले को अंजाम दिया था, उनके स्केच सुरक्षा एजेंसियों ने बुधवार को जारी किए। 26 पर्यटकों की जान लेने वाले ये तीनों दरिंदे पाकिस्तानी हैं और उनके नाम आसिफ फौजी, सुलेमान शाह और अबू तल्हा हैं। इनके कोड नाम मूसा, यूनुस व आसिफ थे और वे पहले से पुंछ में आतंकी घटनाओं में शामिल रहे हैं। 
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हमले के बाद सुरक्षाबल - फोटो : पीटीआई
सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी हमले के प्रत्यक्षदर्शियों की मदद से ये स्केच तैयार कराए हैं। काले और सफेद रंग में तैयार पेंसिल स्केच से तीनों के युवा होने का आभास मिलता है। तीनों ने दाढ़ी भी रखी है। तीनों प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइवा के सहयोगी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) से जुड़े हैं। इसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली है।

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Pahalgam Terror Attack - फोटो : PTI
2019 में सामने आया टीआरएफ, बनाने में लश्कर-ए-ताइबा और आईएसआई का हाथ
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले में 26 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं इस हमले के बाद ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) संगठन एक बार फिर चर्चा में आ गया है। दरअसल इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी टीआरएफ ने ली है। इससे यह भी साबित हो गया है कि कश्मीर की घाटी में यह आतंकी संगठन अभी भी कितना एक्टिव है।
 

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Pahalgam terror attack - फोटो : पीटीआई
2019 में हुआ इसका गठन, सज्जा गुल है मास्टरमाइंड
‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) आतंकी संगठन का गठन साल 2019 में हुआ था। सगंठन का मास्टरमाइंड सज्जाद गुल, जबकि चीफ ऑपरेशनल कमांडर बासित अहमद डार है, जो पाकिस्तान में बैठकर इसे संचालित करता है। इसे बनाने का मकसद यही था कि लश्कर जैसे पुराने आतंकी संगठनों को एक नया चेहरा दिया जा सके ताकि पाकिस्तान का नाम सीधे तौर पर ऐसे हमलों में सामने न आए। बता दें कि इस आतंकी संगठन को बनाने में लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का सीधा हाथ रहा है। 

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हमले के बाद जानकारी देती पीड़ित - फोटो : पीटीआई
1990 के बाद पहली बार किसी आतंकी संगठन को गैर इस्लामिक नाम दिया गया
आईएसआई की रणनीति के तहत ये नाम बदलते रहते हैं। 1990 में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट बनने के बाद पहली बार किसी आतंकी संगठन को गैर इस्लामिक नाम दिया गया है। इस संगठन को अंग्रेजी नाम इसलिए दिया गया ताकि दुनिया को लगे कि ये कोई नया संगठन है और इसमें पाकिस्तान की भूमिका नहीं है।
 

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हमले के बाद सुरक्षाबल - फोटो : पीटीआई
टीआरएफ के कुछ बड़े हमले
अप्रैल 2020
कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में घुसपैठ के बाद हमले में जेसीओ सहित 5 सैनिकों को मारा।
30 अक्तूबर 2020
साउथ कश्मीर के कुलगाम जिले में भाजपा के तीन कार्यकर्ताओं को गोली मारकर हत्या।
26 नवंबर 2020
श्रीनगर के लवेपोरा इलाके के पास श्रीनगर-बारामुला हाईवे पर दो सैनिकों को गोली मारी, हथियार छीने, मर्डर का वीडियो बनाकर पोस्ट किया।
 
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हमले के बाद सुरक्षाबल - फोटो : पीटीआई
भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद चर्चा में आया
टीआरएफ साल 2020 में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद से चर्चा में आया था। टीआरएफ के आतंकी टारगेट किलिंग करते हैं। वो अधिकतर गैर-कश्मीरी लोगों को मारते हैं। जिससे बाहरी लोगों में  दहशत का माहौल बना रहे और वो जम्मू-कश्मीर न आएं।

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