ऐसे अवसर पर हजारों की संख्या में युवाओं की भीड़ उमड़ती थी। यह सब अब अतीत का हिस्सा है। नए जम्मू-कश्मीर में अब केवल कुछ करीबी रिश्तेदार ही ऐसे मौकों पर नजर आते हैं। इससे पहले सुरक्षाबलों द्वारा मारे गए आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में कई बार 10,000 की संख्या में लोग मौजूद रहते थे।