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Nowgam Blast: उर्वरक के रूप में सुरक्षित है अमोनियम नाइट्रेट, लेकिन हीट और मिलावट से बन जाता है विस्फोटक

Sun, 16 Nov 2025 01:42 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू

सार

जम्मू विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एचएन शेख का कहना है कि गर्मी और नमी के संपर्क में आने पर इसके कण आपस में चिपकने लगते हैं और पदार्थ अस्थिर हो जाता है। बाहरी तापमान बढ़ने पर संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।
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नौगाम पुलिस स्टेशन में विस्फोट - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली और श्रीनगर में हुए धमाकों के बाद अमोनियम नाइट्रेट को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। खेतों में उर्वरक के रूप में इस्तेमाल होने वाला यह पदार्थ सामान्य परिस्थितियों में सुरक्षित रहता है लेकिन भंडारण में जरा सी लापरवाही जानलेवा बन सकती है।
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नौगाम पुलिस स्टेशन में विस्फोट - फोटो : अमर उजाला
गलत तरीके से रखा जाना, नमी, गर्म तापमान और पास रखी ज्वलनशील सामग्री सबसे खतरनाक है। अमोनियम नाइट्रेट को जब गोदामों में भारी मात्रा में एक जगह भर दिया जाता है तो स्वभाव बदलने लगता है। जम्मू विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एचएन शेख का कहना है कि गर्मी और नमी के संपर्क में आने पर इसके कण आपस में चिपकने लगते हैं और पदार्थ अस्थिर हो जाता है। बाहरी तापमान बढ़ने पर संवेदनशीलता और बढ़ जाती है, जिससे आग लगने की स्थिति में यह तेजी से प्रतिक्रिया करता है। 
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नौगाम पुलिस स्टेशन में विस्फोट - फोटो : बसित जरगर
सामान्य धमाकों से कई गुना ताकतवर ... प्रोफेसर डॉ कुलदीप राज
शर्मा बताते हैं कि असली खतरा तब पैदा होता है जब इसे ज्वलनशील चीज के पास रखा हो या मिलावट हो जाए। यह फटता नहीं, लेकिन आग बढ़ाता है। तेल, पेट्रोल या ऐसी किसी सामग्री के संपर्क में आते ही विस्फोटक की तरह व्यवहार करता है। अमोनियम नाइट्रेट का धमाका सामान्य विस्फोट से ज्यादा शक्तिशाली होता है। उठने वाली तेज लहर दूर तक दीवारों, इमारतों, खिड़कियों और वाहनों को क्षतिग्रस्त कर देती है। बंद जगह में दबाव बढ़ने के कारण इसका असर कई गुना बढ़ जाता है।

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नौगाम पुलिस स्टेशन में विस्फोट - फोटो : बसित जरगर
मालेगांव में भी निशान
महाराष्ट्र के मालेगांव में 2006 में धमाके की जांच में अमोनियम नाइट्रेट की मौजूदगी मिली थी। इसके निशान बाइक, कपड़ों के टुकड़ों और मलबे से बरामद हुए थे। अमोनियम नाइट्रेट को तेल और दूसरी ज्वलनशील सामग्री के साथ मिलाकर विस्फोटक तैयार किया गया था। यह उदाहरण है कि साधारण पदार्थ कितना बड़ा खतरा बन सकता है।
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नौगाम पुलिस स्टेशन में विस्फोट - फोटो : बसित जरगर
बेरूत में 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट फटने से हुई थीं 218 मौतें
बेरूत के बंदरगाह पर कई साल तक 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट बिना सुरक्षा मानक के रखा था। जहां न नमी का नियंत्रण था और न तापमान की निगरानी। अगस्त 2020 में गोदाम में आग लगने के बाद पूरी मात्रा विस्फोट में बदल गई। धमाका इतना भीषण था कि 218 लोग मारे गए और कई किलोमीटर तक इमारतें ध्वस्त हो गईं। बंदरगाह का बड़ा हिस्सा मलबे में बदल गया।

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