मोहर्रम का जुलूस निकालने पर प्रतिबंध को देखते हुए हिंसा की आशंका में श्रीनगर शहर और घाटी के कई हिस्सों में मंगलवार को कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगाए गए। श्रीनगर के संवेदनशील लाल चौक और आसपास के इलाकों के सभी प्रवेश द्वारों को कंटीले तारों से सील कर दिया गया। पुराने शहर में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए गए हैं।
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हाल-ए-कश्मीर
- फोटो : बासित जरगर
अधिकारियों ने बताया कि घाटी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन कई इलाकों में प्रतिबंध लगाए गए। हालांकि, प्रतिबंध लगाए जाने का कोई कारण नहीं बताया गया, लेकिन माना जा रहा है कि मोहर्रम के जुलूस को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। गत पांच अगस्त को राज्य का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद धीरे-धीरे माहौल सामान्य होने पर घाटी के लगभग सभी इलाकों से चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध हटाया गया।
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हर शुक्रवार को संवेदनशील इलाकों में प्रतिबंध लगाया जाता है। इसके पीछे वजह यह है कि कुछ स्वार्थी तत्व बड़ी मस्जिदों तथा धार्मिक स्थलों पर अधिक संख्या में लोगों के इकट्ठा होने का फायदा उठा सकते हैं।
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इस बीच 37वें दिन हालात में और सुधार हुआ है। कुछ इलाकों में सड़कों पर सार्वजनिक वाहन दौड़ रहे हैं। निजी वाहन बिना किसी रोकटोक के आ जा रहे हैं। लैंडलाइन सेवाएं बहाल कर दी गई हैं। हालांकि, मोबाइल तथा इंटरनेट सेवा अब भी ठप है।
कई अलगाववादी नेता अब भी हिरासत में हैं। पूर्व मुख्यमंत्रियों फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत मुख्यधारा के कई नेता या तो हिरासत में हैं या उन्हें नजरबंद रखा गया है। कई नेताओं तथा पत्थरबाजों को राज्य से बाहर की जेलों में भेजा गया है।