lal chock srinagar
- फोटो : बासित जरगर
जब 1989 में कश्मीर में आतंकवाद शुरू हुआ तो इस जगह पर अलग-अलग घटनाएं हुईं। अलगाववादियों के लाल चौक मार्च के आह्वान पर प्रशासन इसे सील कर देता था। 2018 में अमरनाथ भूमि विवाद में बड़ी संख्या में लोग घंटाघर पर एकत्र हो गए थे। उन्हें अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने संबोधित किया था। उस समय यहां पर एक अन्य झंडा फहराया गया था।
अलगाववादी-आतंकवादी और पाकिस्तान समर्थक समूहों के खिलाफ प्रशासन सख्त
मोदी के नेतृत्व में जब केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया तो प्रशासन, अलगाववादी-आतंकवादी और पाकिस्तान समर्थक समूहों के खिलाफ सख्त हो गया। जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक सहित कई अलगवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया गया।
इसके अलावा हुरियत के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक को भी नजरबंद रखा गया। पथराव करने वाले और आतंकियों से हमदर्दी रखने वालों पर भी शिकंजा कसा गया। इसके बाद पूरे घाटी की स्थिति बदल गई।