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नगरोटा मुठभेड़ का एक साल: गोला-बारूद से भरे ट्रक में छिपकर कश्मीर जा रहे थे खूंखार आतंकी, जवानों ने ऐसे किया था ढेर

Mon, 15 Nov 2021 11:51 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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नगरोटा मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला
बर्फबारी को देखते हुए नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा अलर्ट के साथ ही आंतरिक सुरक्षा को और बढ़ा दिया गया है। सर्दी के मौसम में आतंकवादी घुसपैठ की फिराक में रहते हैं। बीते साल नवंबर महीने में चार आतंकियों ने ऐसी ही नापाक हरकत की थी। हालांकि इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर अलर्ट रहते हुए सुरक्षाबलों ने घाटी को दहलाने की बड़ी साजिश को नाकाम किया था। इस दौरान जम्मू के नगरोटा में जवानों ने चारों आतंकियों को ढेर किया था। 

आतंकियों को कश्मीर ले जाने वाले ट्रक की मूवमेंट लखनपुर में नौ नवंबर को दर्ज हुई थी। ट्रक एक नवंबर को सुबह आठ बजकर 51 मिनट पर लखनपुर के रास्ते प्रदेश में दाखिल हुआ था। जिस ट्रक से आतंकी कश्मीर जा रहे थे उस ट्रक का रजिस्ट्रेशन नंबर कश्मीर का था और नंबर प्लेट फर्जी थी। सुबह पांच बजे के करीब सुरक्षाबलों ने एक ट्रक को रोका, इस ट्रक में आतंकी मौजूद थे। आगे की स्लाइड में मुठभेड़ और सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानिए अहम बातें...
 
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नगरोटा मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला
आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग की और जंगल की तरफ भाग निकले। इस दौरान सुरक्षाबलों ने जंगल में तलाशी अभियान के दौरान आतंकियों से आत्मसमर्पण के लिए कहा, लेकिन आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी कर दी। 

 
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नगरोटा मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला।
सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकियों को मार गिराया। वहीं, मुठभेड़ में एसओजी के दो जवान घायल हुए थे। 

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नगरोटा मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला
सुरक्षाबलों ने जांच के दौरान ट्रक से भारी मात्रा में गोला-बारूद और हथियार बरामद किया था। आतंकियों के पास से कुल 11 एके-47 राइफलें बरामद हुई थीं।

 
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एलओसी - फोटो : साकिब नबी
आतंकी संगठनों की ऐसी ही नापाक हरकतों को देखते हुए नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार से घुसपैठ की आशंकाओं और पीर पंजाल के ऊपरी इलाकों में बर्फबारी के मद्देनजर राजोरी जिले में आंतरिक सुरक्षा ग्रिड को और मजबूत किया गया है।
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एलओसी - फोटो : साकिब नबी
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अक्तूबर और नवंबर में घुसपैठ की कोशिशें बढ़ जाती हैं, क्योंकि राजोेरी जिले में पीर पंजाल के ऊपरी इलाकों में बर्फबारी से अधिकांश पहाड़ी मार्ग बंद हो जाते हैं। इनके बंद होने के पहले आतंकवादी घुसपैठ की फिराक में रहते हैं।
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