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अनंतनाग के इस मंदिर का मुस्लिम कर रहे हैं निर्माण, अजान और आरती होगी एक साथ

Thu, 18 Mar 2021 01:20 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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temple of Anantnag - फोटो : अमर उजाला
तीन दशक से जर्जर मंदिर का जीर्णोद्धार हो रहा है। अनंतनाग के डलसीर इलाके में स्थित पुराने मंदिर की चारदीवारी बनाई जा रही है। छत भी नई बनाई गई है। ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिलकर मुस्लिम समुदाय के युवा और बुजुर्ग मंदिर के जीर्णोद्धार में जुटे हुए हैं। पास ही मस्जिद और दरगाह है। डलसीर के लोगों को बेसब्री से इंतजार है कि कब मस्जिद की अजान और मंदिर में आरती के साथ घंटियाें की ध्वनि पहले की तरह रोज सुनाई दे। श्रीगुफवारा से कुछ ही किलोमीटर दूर डलसीर मंदिर के साथ अपनी यादों को साझा करते हुए मुश्ताक अहमद राथर कहते हैं - 30 साल का अर्सा कल ही की तरह लगता है। दोनों समुदायों के बच्चे और युवा एक साथ क्रिकेट खेलते थे।
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अनंतनाग का मंदिर - फोटो : अमर उजाला
ईद, हेरथ जैसे पर्व-त्योहार से लेकर खास दिनों में मुबारकबाद और दावत साथ होती थी। स्थानीय लोगाें के जेहन में वो सुनहरे दिन आज भी ताजा हैं। अब डलसीर मंदिर की दीवार, छत नई बनाई गई है। और भी निर्माण चल रहे हैं, जिसमें स्थानीय युवा और बुजुर्ग भी जुटे हुए हैं।
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अनंतनाग का मंदिर - फोटो : अमर उजाला
जीर्णोद्धार कार्य में हाथ बंटा रहे लतीफ अहमद, इरशाद अहमद और निसार अहमद ने कहा कि 200 मीटर के दायरे में मस्जिद, दरगाह और मंदिर है। एक दूसरे के नजदीक यह धार्मिक स्थल कश्मीरियत की तहजीब को बयां करते हैं।

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अनंतनाग का मंदिर - फोटो : अमर उजाला
पहले अजान और मंदिरों की घंटियां रोज सुनने को मिलती थीं। अब खास दिनाें में ही ऐसा मुमकिन हो पाता है। सभी लोग पंडितों की वापसी की दुआ करते हैं।
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अनंतनाग का मंदिर - फोटो : अमर उजाला
पंडित शिक्षकों की तालीम से अच्छे ओहदों पर हैं युवा
डलसीर गांव के कई लोग सरकारी नौकरी कर रहे हैं। कई तो अच्छे ओहदों पर भी हैं। स्थानीय लोगाें का कहना है कि कश्मीरी पंडित शिक्षकों ने जो तालीम दी, आज उसी से बच्चों का मुस्तकबिल बना है। कश्मीरी पंडितों की कमी शिद्दत से खलती है। मंदिर को फिर से बनाने में मुसलमानों का जुटना इसी अहसास को दर्शाता है।
 
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