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भारतीय सेना को बेहद घातक बनाती हैं ये राइफल, पलक झपकते ही दुश्मन हो जाता है ढेर

Sat, 20 Jun 2020 04:41 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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भारतीय सेना के राइफल - फोटो : सोशल मीडिया
संख्या और शक्ति के मामले में भारतीय सेना को दुनिया की श्रेष्ठतम सेनाओं में गिना जाता है। भारतीय सेना के शौर्य के चर्चे विश्वभर में होते हैं। सेना अपनी शक्ति को बढ़ाने के लिए एक से बढ़कर एक घातक राइफलों का प्रयोग करती है।
जानिए, ऐसी ही कुछ राइफल के बारे में जिनसे खौफ खाते हैं दुश्मन..
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भारतीय सेना - फोटो : अमर उजाला

इंसास राइफल वर्तमान में सेना में बड़े पैमाने पर उपयोग की जा रही है। इंसास का पूरा नाम इंडियन न्यू स्मॉल आर्म्स सिस्टम है। इस भारतीय राइफल को ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ने बनाया है।

 

 

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एके 47 राइफल - फोटो : अमर उजाला

एके सीरिज की विभिन्न राइफलों का प्रयोग विश्व के कई देशों की सेनाएं करती हैं। इसमें भारत भी शामिल है। यह राइफल सेमी ऑटोमेटिक और फूली ऑटोमेटिक मोड में फायर करने में सक्षम है। यह एक मिनट में 600 राउंड फायरिंग कर सकती है।

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एके 103 और 203 राइफल - फोटो : अमर उजाला

भारतीय सेना वर्तमान में एके 103 राइफल का प्रयोग करती है। इसके अलावा एके सीरिज की 203 राइफल्स के उत्पादन के लिए अमेठी में कारखाना लगाया गया है। यह कारखाना रूस के सहयोग से लगाया गया है। इस राइफल में नाइट विजन के साथ टेलिस्कोपिक लेंस भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा इसमें अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर का भी प्रयोग किया जा सकता है।

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ड्रेगुनोव स्नाइपर राइफल - फोटो : सोशल मीडिया

सोवियत रूस में बनी इस स्नाइपर राइफल का प्रयोग शीत युद्ध के दौरान किया जाता था। इस राइफल में 7.62×54 मिलीमीटर का कॉर्टरेज प्रयोग किया जाता है। इसमें 10 राउंड की मैगजीन बॉक्स का प्रयोग किया जाता है। इस राइफल की प्रभावी रेंज 800 से 900 मीटर तक मानी जाती है।

 

 

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एसएएफ कार्बाइन 2ए1 - फोटो : सोशल मीडिया

यह बंदूक सब मशीन गन 1ए1 का साइलेंस वर्जन है। जिसके बैरल में साइलेंसर फिट किया गया है। यह कानपुर में आयुध निर्माणी द्वारा बनाया गया है। यह एक हल्के वजन का हथियार है और स्वचालित फायरिंग में सक्षम है। यह 150 राउंड प्रति मिनट की दर से फायरिंग कर सकता है। इसका उपयोग ज्यादातर आतंकवादी हमलों का मुकाबला करने के लिए विशेष बलों द्वारा किया जाता है। एसएएफ कार्बाइन 2-ए-1 का उपयोग भारतीय सेना और भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो या मार्कोस कमांडो द्वारा किया जाता है।

 

 

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आईएमआई टॉवोर टार 21 राइफल - फोटो : सोशल मीडिया

इस राइफल का उपयोग मार्कोज, गरुड़, पैरा रेजीमेंट, सीआरपीएफ और अन्य विशेष बल करते हैं। यह राइफल इजरायल मूल की है।

 

 

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एनएसवी हैवी मशीन गन - फोटो : सोशल मीडिया

सोवियत निर्मित इस मशीन गन का निर्माण आयुध कारखानों बोर्ड के आयुध निर्माणी तिरुचिरापल्ली में किया गया है।

 

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पिस्टल - फोटो : सोशल मीडिया

भारतीय सेना सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल ऑटो 9-एमएम 1-ए का प्रयोग करती है। इसके अलावा सीआरपीएफ, राज्य पुलिस भी इस हथियार का इस्तेमाल करती है। इसमें सामान्यत: 13 राउंड की मैगजीन प्रयोग की जाती है। इसका उत्पादन लाइसेंस के तहत राइफल फैक्ट्री इसापोर में किया जाता है।

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