जम्मू-कश्मीर के सपूत कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल के साहस के आगे दुनिया के सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची पर्वत शृंखलाएं भी बौनी साबित हुई हैं। चार जनवरी को उन्होंने अंटार्कटिका के माउंट विंसन मैसिफ की सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी कर ली है। इसके साथ ही कर्नल रनवीर सिंह जम्वाल देश के पहले सैन्य अधिकारी बन गए हैं, जिन्होंने सात महाद्वीपों की कठिन और सबसे ऊंची चोटियों को फतेह किया है। मूल रूप से सांबा जिला के भडौरी गांव के रहने वाले कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल 25 दिसंबर को रवाना हुए थे। वीरवार सुबह ही इस सम्मिट को पूरा करने के बाद अंटार्कटिका के पुंटा अरीनास में लैंड किया। उन्होंने इस सम्मिट को पूरा करने के लिए दोस्तों और देशवासियों की दुआओं और सहयोग पर आभार जताया है।
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कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल
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इससे पहले रणवीर जम्वाल एशिया और विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट, अफ्रीका के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट किलिमंजारो, ऑस्ट्रेलिया में माउंट कार्सटेंस पिरामिड, यूरोप में माउंट एल्ब्रस, दक्षिण अफ्रीका में माउंट एकॉनकागुआ और उत्तरी अमेरिका में माउंट डेनाली पर चढ़ाई पूरी कर चुके हैं। उनको माउंट एवरेस्ट पर तीन बार सफलतापूर्वक चढ़ने का गौरव प्राप्त है। छह महाद्वीपों में 30 से अधिक सम्मिट किए हैं। वे तीन एवरेस्ट सम्मिट में भाग लेने वाले भारत के एकमात्र व्यक्ति हैं और उनके गतिशील नेतृत्व में कुल 51 पर्वतारोही एवरेस्ट पर चढ़ाई चुके हैं।
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कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल
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सात महाद्वीपों का सफर...
पर्वत
ऊंचाई (फीट में)
तिथि
माउंट विंसन मैसिफ
16050
4, जनवरी 2019
माउंट किलिमंजारो
19340
23, अक्तूबर 2010
माउंट कार्सटेंस पिरामिड
16024
9, अक्तूबर 2015
माउंट एल्ब्रस
18510
26, जून 2014
माउंट एकॉनकागुआ
22841
1, जनवरी 2013
माउंट डेनाली
20320
20, जून 2017
माउंट एवरेस्ट
29035
2012, 2013 और 2016
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तीन बार की एवरेस्ट पर चढ़ाई
कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल ने दृढ़ संकल्प से एक या दो नहीं, बल्कि तीन बार एवरेस्ट को अपने सामने समर्पण करने के लिए मजबूर किया है। सांबा जिला की कंडी बेल्ट के एक छोटे से गांव भडौरी के रहने वाले कर्नल जम्वाल ने रत्नूचक सैन्य स्कूल से शिक्षा हासिल की, जिसके बाद बुलंद हौसले और कठोर परिश्रम से उन्होंने सफलतापूर्वक आर्मी कैडेटस कॉलेज (एसीसी) में प्रवेश किया और फिर जाट रेजिमेंट में एक अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया।
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कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल
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विकट परिस्थितियों में भी नहीं डगमगाए कदम
कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल ने 2009 में एक हिमालयन सम्मिट के दौरान अपनी एक अंगुली गंवा दी थी, बावजूद इसके उनका हौसला नहीं टूटा। 2015 में आए भूकंप के दौरान कर्नल जम्वाल और उनकी टीम ने 60 पवर्तारोहियों की जान बचाई। यह पर्वतारोही नेपाल में एवरेस्ट के बेस कैंप पर फंस चुके थे, जब विनाशकारी भूकंप ने दस्तक दी। 7.9 तीव्रता के नेपाल भूकंप के बाद 2015 में ही एवरेस्ट आधार शिविर में एक भूस्खलन हुआ था, जिसमें कई अभियान दलों के शिविर तबाह हो गए थे और 22 अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही व स्थानीय शेरपा मारे गए थे। कर्नल जंवाल और उनकी टीम ने यहां भी सफलतापूर्वक कई पर्वतारोहियों की जान बचाई।
देश के सर्वोच्च एडवेंचर अवार्ड से भी नवाजे गए
अर्जुन अवार्ड की बराबरी वाले देश के सर्वोच्च एडवेंचर अवार्ड तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार से कर्नल रणवीर जम्वाल को नवाजा जा चुका है। उन्हें 13, जनवरी 2013 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने विराट कोहली और कई अन्य खिलाड़ियों के साथ सम्मान से नवाजा गया था। उन्हें प्रतिष्ठित विशिष्ट सेवा पदक सहित सेना से सात पुरस्कार मिल चुके हैं। उत्कृष्ट खिलाड़ी मानते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार के सर्वोच्च पुरस्कार शेर-ए-कश्मीर अवार्ड से भी उन्हें नवाजा जा चुका है। 2017 में भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन (आईएमएफ) की ओर से कर्नल जम्वाल को भारत का सर्वश्रेष्ठ पर्वतारोही भी घोषित किया गया है।