जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस को मात देने के लिए मार्कोस कमांडो ने मोर्चा संभाल रखा है। दुर्गम इलाकों में लोगों तक पहुंचकर देश के ये वीर सपूत उनकी मदद कर रहे हैं। भारतीय नौसेना के मार्कोस कमांडो वुलर झील इलाके में दुर्गम स्थानों पर पहुंचकर मछुआरों व अन्य लोगों को कोरोना वायरस से बचाव के बारे में जागरूक कर रहे हैं। साथ ही उन्हें राशन भी उपलब्ध करा रहे हैं।
जानिए मार्कोस कमांडो के बारे में कुछ विशेष बातें...
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मार्कोस कमांडो
- फोटो : अमर उजाला
मार्कोस इंडियन नेवी की एक स्पेशल ऑपरेशन यूनिट है। मार्कोस मरीन कमांडो सबसे ट्रेंड और आधुनिक माने जाते हैं। मार्कोस (समुद्री कमांडो) जिसे 1987 में स्थापित किया गया था। मार्कोस कमांडो बनना आसान नहीं है।
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मार्कोस कमांडो
- फोटो : अमर उजाला
इसका प्रशिक्षण शायद दुनिया में सबसे मुश्किल है। मार्कोस के लिए स्पेशल जवानों का चयन किया जाता है। चयन के मानदंड काफी मुश्किल होते हैं। चुने गए मार्कोस को कठोर ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है, वहीं हजारों में से कोई एक ही चुना जाता है। जवान को जांघों तक भरे हुए कीचड़ में भागना पड़ता है। इतना ही नहीं कंधे पर 25 किलोग्राम का बैग भी होता है।
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मार्कोस कमांडो
- फोटो : अमर उजाला
इसका मकसद कांउटर टेररिज्म, डायरेक्ट एक्शन ऑन किसी जगह का खास निरीक्षण, अनकंवेंशनल वॉरफेयर, होस्टेंज रेस्यूकस, पर्सनल रिकवरी और इस तरह के खास ऑपरेशनों को पूरा करना है।
देश के ये कमांडो जमीन, समुद्री और हवा में लड़ने के लिए पूरी तरह से सक्षम होते हैं। मार्कोस को यूएस नेवी के स्पेशल फोर्स सील्स की तरह ट्रेंड किया गया है। मार्कोस ने कारगिल वार, ऑपरेशन लीच, ऑपरेशन स्वान जैसे खतरनाक मिशन को अंजाम दिया है।