माता वैष्णो देवी के भवन द्वार पर बुधवार की दोपहर को गेट नंबर तीन के पास एक बड़ी चट्टान गिर गई। इसके नीचे दबकर सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल की मौत हो गई। हादसे के तत्काल बाद यात्रा रोक दी गई।
विज्ञापन
2 of 8
vaishno devi
- फोटो : Amar Ujala
मृतक हेड कांस्टेबल हरवींद्र सिंह पुत्र सरवन सिंह गालिया (होशियारपुर, पंजाब) के रहने वाले थे। हरवींद्र सिंह सीआरपीएफ की छठी बटालियन में तैनात थे। हादसे के समय हरवींद्र सुरक्षा जांच के लिए गेट नंबर तीन पर तैनात थे।
विज्ञापन
3 of 8
vaishno devi
- फोटो : Amar Ujala
जानकारी के मुताबिक मूसलाधार बारिश के बाद दोपहर करीब एक बजे गेट के मुख्य द्वार के पास एक बड़ी चट्टान अचानक गिर गई। हरवींद्र सिंह इसके नीचे दब गए। गेट नंबर तीन पर अकसर यात्रियों की लंबी कतार रहती है। हालांकि, हादसे में किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है।
4 of 8
vaishno devi
- फोटो : Amar Ujala
हादसे के तत्काल बाद श्राइन बोर्ड राहत दल, पुलिस और सीआरपीएफ के जवान बचाव कार्य में जुट गए। दोनों ओर से यात्रा को रोक दिया गया। बचाव कार्य शुरू होने से पहले कई अन्य लोगों के दबने की भी आशंका जताई जा रही थी। लेकिन, डेढ़ घंटे चले बचाव कार्य के बाद यह साफ हो गया गया कि हादसे में कोई अन्य घायल नहीं हुआ है।
विज्ञापन
5 of 8
vaishno devi
- फोटो : Amar Ujala
बताया जा रहा है कि बुधवार को दर्शन करने वाले यात्रियों की संख्या काफी कम थी। हादसे के करीब दो घंटे बाद यात्रा को फिर से सुचारु कर दिया गया। श्राइन बोर्ड के सीईओ एके साहू के अनुसार हादसे के बाद से दर्शन के लिए भक्तों की आवाजाही निकास द्वार के रास्ते की जा रही है।
विज्ञापन
6 of 8
vaishno devi
- फोटो : Amar Ujala
गौरतलब है कि 18 दिन पहले इसी गेट के पास चट्टान गिरने से तीन लोग घायल हो गए थे। एक घायल बच्चे की दो दिन बाद मौत हो गई थी। इस घटना के कुछ घंटों बाद ही अर्द्ध कुंवारी के पास भारी भूस्खलन हुआ था। इसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और आधा दर्जन यात्री घायल हो गए थे।
विज्ञापन
7 of 8
भूस्खलन के बाद गेट नंबर दो को श्रद्धालुओं के लिए खोला दिया गया
- फोटो : FILE
माता वैष्णो देवी भवन में लगातार होने वाले भूस्खलन की घटनाओं के लिए स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्यों के लिए पहाड़ियों से की जाने वाली छेड़छाड़ को कारण बताया है।
लोगों का कहना है कि त्रिकुटा पहाड़ी पर घटती पेड़ों की संख्या और लगातार हो रहे निर्माण से चट्टानें कमजोर हुईं हैं। लोगों का कहना है कि त्रिकुटा पहाड़ियों पर निर्माण कम किए जाने चाहिए ताकि ऐसे बड़े हादसों को रोका जा सके।