जम्मू के किश्तवाड़ के चिशोती गांव में दर्दनाक मंजर है। इस गांव की करीब 400 लोगों की आबादी है। 75 घर हैं। तबाही में 10 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। चार अब भी लापता हैं। जहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर जश्न का माहौल होता था, वहां अब जेसीबी मशीनों का शोर और दर्द है।
जम्मू के किश्तवाड़ के चिशोती गांव में अब मलबे का ढेर, तबाह हो चुके मकान और खौफ का माहौल है। यहां लापता लोगों की खोज का काम वीरवार से जारी है। इंसानों के साथ-साथ मकान भी सैलाब में बह गए हैं। करीब 75 घर और करीब 400 लोगों की आबादी वाला यह छोटा-सा गांव अचानक आए सैलाब से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। 10 लोगों की मौत हो चुकी हैं जबकि चार लोग अब भी लापता हैं।
चिशोती गांव में हर घर में आंसुओं और चीखों की गूंज है। शुक्रवार को यहां नौ चिताएं जलीं। श्मशान घाट पर इतनी जगह नहीं है एक साथ इतनी चिताएं जलाई जाएं। इस लिए गांव वालों ने दो पालियों में चिताएं जलाईं। एक चिंता अभी ठंडी भी नहीं हुई थी दूसरे शव को जलाने की तैयारी हो जाती थी।
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किश्तवाड़ आपदा
- फोटो : अमर उजाला
वीरवार के बाद से गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला था। गांव में श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर में धार्मिक आयोजन होता था, लेकिन इस बार सिर्फ मलबे के नीचे अपनों की तलाश की जा रही है। गांव की सुखी देवी का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
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किश्तवाड़ आपदा
- फोटो : अमर उजाला
'जिस बेटा-बेटी का सहारा था, वही चले गए'
उनकी 11 साल की बेटी सैलाब के बाद से लापता है, जबकि पिता की मौत हो चुकी है। वह एक साथ पति की लाश और बेटी की तलाश के बीच टूटती जा रही हैं। रोते हुए वह कहती हैं जिस बेटा-बेटी का सहारा था, वही चले गए।
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आईजीपी जम्मू और डीआईजी डीकेआर
- फोटो : अमर उजाला
मेरी बच्ची कहां होगी, नहीं पता। हम सब आंगन में थे, अचानक तेज आवाज सुनी और सैलाब सब कुछ ले गया। इसी गांव के बलवंत सिंह के पिता, जो मंदिर में थे, जब सैलाब आए वही पर थे, उसके बाद उनका पता नहीं चल पाया है। उनकी कोई खबर नहीं पा सके हैं।
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किश्तवाड़ आपदा
- फोटो : अमर उजाला
'मचैल माता ने किस गुनाह की सजा दी, नहीं पता'
गांव वालों का कहना है कि मचैल माता ने किस गुनाह की सजा दी, नहीं पता। वीरवार को सुबह मौसम ठीक था, बारिश थी, लेकिन इतना अंदाजा नहीं था की इस कदर सैलाब आएगा और सबकुछ कुछ ही मिनटों में बहा कर ले जाएगा।
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किश्तवाड़ आपदा
- फोटो : अमर उजाला
खेत, घर, मंदिर और दुकानें बह गई और कुछ मलबे में दब गए। अब गांव में सिर्फ टूटे घर और मलबे के ढेर रह गए हैं। राहत व बचाव कार्य जारी है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उनके जख्म इतने गहरे हैं कि किसी भी मदद से भर नहीं सकते। उनका कहना है कि गांव खतरे के मुहाने पर खड़ा।
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किश्तवाड़ आपदा
- फोटो : अमर उजाला
हर तरफ गम-गुस्सा और बेबसी
किश्तवाड़ में हर तरफ तबाही, लापता अपनों की तलाश और जान बची तो लौटने की हड़बड़ी नजर आ रही है। आवश्यक सेवाएं ठप होने से भी लोग परेशान और गुस्से में दिखे। आसमानी आफत के बीच घबराए लोगों को गम-गुस्सा और बेबसी ने घेर रखा है। हालांकि कुछ समझाने पर, ढांढस बंधाने पर वे शांत हो जा रहे हैं, पर रह-रहकर इंतजार भारी पड़ता दिख रहा है।
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किश्तवाड़ आपदा
- फोटो : अमर उजाला
मचैल से लौट रहे यात्रियों ने कई बार अपना आक्रोश प्रदर्शन के रूप में जाहिर किया। मौके की नजाकत को समझते हुए इसे बहुत ही अच्छी तरीके से नेता मौजूद विधायकों, जिला प्रशासन के अधिकारियों ने संभाला।
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किश्तवाड़ आपदा
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल चिशोती में नाले को पार कराने में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ सहित पुलिस व सेना के जवान लगे हुए हैं। पार पहुंचने के बाद लगभग दो किमी दूर तक श्रद्धालुओं को पैदल ही जाना पड़ रहा है। वहां पर वाहन नहीं मिलने से वे अपना रोष और गुस्सा प्रदर्शन करके निकाल रहे हैं।
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चिशोती पहुंचे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला
- फोटो : अमर उजाला
नेता प्रतिपक्ष और विधायक ने समझा-बुझाकर मामला संभाला
आक्रोश बढ़ता देख नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा और विधायक शगुन परिहार ने श्रद्धालुओं को शांत करवाया। उनके साथ खड़े रहे। असुविधा के लिए क्षमा मांगते रहे, उन्हें ढांढस बंधाते रहे। एआरटीओ तसलीम वानी से अतिरिक्त वाहन मंगवाए तब जाकर उनका गुस्सा शांत हुआ।
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चिशोती पहुंचे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला
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रोते-रोते लौट रहे, ढांढस बंधाना मुश्किल
घरों की ओर लौट रहे यात्रियों की बेबसी उनकी आंखों से आंसू बनकर बहती दिखाई दे रही है। मचैल से लौटे हजारों यात्री गुलाबगढ़ में इकट्ठा हुए। हर किसी का आंखों से आंसू बह रहे थे। मुड़-मुड़ कर पीछे छोड़ आए हालात को देख रहे थे। बचाव टीमें उन्हें सावधानी से नाला पार करवा रही थीं। जिंदा लौटने की खुशी से ज्यादा उनकी आंखों में गम था, इतनी तबाही ने उन्हें झकझोर कर रख दिया था।
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किश्तवाड़ में तबाही
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आक्रोश जायज है : सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा, लोगों का आक्रोश जायज है। बीते दो दिन से वे अपने परिजनों का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन उन्हें अभी तक राहत की खबर नहीं मिली है। मलबे में दबे उनके परिजनों को भी पाना चाहते हैं। जीवित न सही तो उनके शव ही सही, लेकिन उनके अपने मिलने चाहिए। इसलिए उनका आक्रोशित होना स्वाभाविक है। प्रदेश सरकार ने राहत और बचाव कार्य के लिए हर संभव प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे में लापता हुए लोगों को तलाशने का अभियान चल रहा है।
किश्तवाड़ के चिशोती में बादल फटने की त्रासदी ने कई घरों को गम में डुबो दिया।
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ये भी नाराजगी का कारण
-बिजली-पानी की सेवाएं ठप होने पर भी जताई नाराजगी, बहाल करने की मांग
-अपनों की तलाश में तीन दिन का इंतजार पड़ रहा भारी, तलाश तेज करने को कह रहे
-नेटवर्क खराब, घर-गृहस्थ तबाह होने से परेशान हो रहे लोग, रह-रहकर नाराजगी जता रहे थे