किश्तवाड़ में मचैल यात्रा पर आईं महिला यात्री बचनी और गुड़िया ने दो मिनट के फासले से मौत को पीछे छोड़ दिया। लेकिन उनकी सहेली के पति और सास सैलाब में बह गए। दोनों करीब 70 लोगों के साथ बस में मचैल यात्रा पर आई थीं। कई का पता नहीं है।
किश्तवाड़ के चिशोती में वीरवार को बादल फटने से आई तबाही में लगातार मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। चिशोती में हर तरफ तबाही के निशां हैं, सेना, सीआईएसएफ, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमें मलबे में जिंदगी की तलाश में जुटी हैं।
वहीं, दो महिला यात्री बचनी और गुड़िया मचैल यात्रा पर आए उन भाग्यशाली लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने महज दो मिनट के फासले से मौत को मात दे दी। वे लंगर खाने के लिए नहीं रुकीं और जैसे ही पुल पार किया सैलाब आ गया।
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घटनास्थल पर जुटीं जेसीबी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पर, दुखद यह है कि उनकी सहेली के पति और सास इस सैलाब में बह गए। शुक्रवार शाम जब एनडीआरएफ की टीम ने जम्मू की रहने वाली बचनी और उनके साथ आईं गुड़िया को निकाला तो पुल पार करते ही वे धम्म से जमीन पर गिर गईं।
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सामान समेटते ग्रामीण
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उनमें खड़े होने तक का साहस नहीं बचा था। नाम पूछने पर बचनी रो पड़ीं। कुछ बोलने के बजाय वे बार-बार मुड़कर नाले की तरफ देखती रहीं। पथराई आंखों के सामने मानो तबाही के मंजर का फ्लैशबैक फिर चल पड़ा हो।
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मचैल यात्रा पर आईं यात्री बचनी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बोलने को हुईं तो जुबां लड़खड़ा रही थी। किसी तरह खुद के दुख-दर्द को सीने में जब्त करते हुए बचनी बोलीं, मेरे साथ करीब 70 और लोग थे। कई का कुछ पता नहीं चल रहा...।
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मचैल यात्रा पर आईं यात्री गुड़िया
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गुड़िया भी अपने आंसुओं को रोक नहीं पा रही थीं। गुड़िया की भी बचनी जैसी हालत थी। बार-बार मुड़कर पुल के नीचे बहते पानी को देखतीं और आंखों से आंसू टपक पड़ते।
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14 अगस्त को आई आपदा में तीनों मंदिर बह गए
- फोटो : अमर उजाला
उनकी मनोदशा से साफ था कि वे भी अपने साथ आए बहुत से लोगों के न मिलने से परेशान हैं। गुड़िया इससे पहले भी इस यात्रा पर आईं थीं, लेकिन ऐसा सैलाब उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा था। अपने बचने को वे भी चमत्कार करार देती हैं।
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किश्तवाड़ के चिशोती में बादल फटने की त्रासदी ने कई घरों को गम में डुबो दिया।
- फोटो : अमर उजाला
शायद ही अब कभी यहां आने की हिम्मत जुटा पाऊं
बचनी अपने बच जाने को एक चमत्कार ही मानती हैं। वे लंगर में बैठना चाहती थीं, लेकिन नहीं बैठीं और पुल पार करने लगीं। बचनी के अनुसार दो मिनट के फासले की वजह से वे बच गईं। बचनी कहती हैं जो कुछ मैंने यहां देखा शायद ही जिंदगी में फिर यहां आने की हिम्मत जुटा पाऊं।
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किश्तवाड़ आपदा
- फोटो : अमर उजाला
किश्तवाड़ : अब तक 60 शव मिले, 200 लापता की तलाश
किश्तवाड़ के चिशोती में वीरवार को बादल फटने से आई तबाही में मौतों का आंकड़ा 60 तक पहुंच गया है। मृतकों में ज्यादातर मचैल माता मंदिर में आए श्रद्धालु हैं। बचाव और राहत कार्य जारी है। मलबे में दबे लोगों की तलाश में 45 जेसीबी मशीनों को लगाया गया है।
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किश्तवाड़ आपदा
- फोटो : अमर उजाला
अब भी करीब 200 लोग लापता बताए जा रहे हैं। गांव में हर तरफ तबाही का मंजर है। जिस तरह से तबाही का मंजर है, उससे मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। किश्तवाड़ के उपमंडल पाडर के चिशोती गांव में ही प्रसिद्ध मचैल माता मंदिर का आखिरी पड़ाव है।
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किश्तवाड़ आपदा
- फोटो : अमर उजाला
यहीं से मंदिर जाने के लिए 8.5 किमी की पैदल यात्रा शुरू होती है। वीरवार को यहां श्रद्धालु जमा थे कि बादल फटने से तबाही आ गई। वीरवार देर रात तक 52 लोगों की मौत की सूचना थी। शनिवार को मौतों को लेकर अलग-अलग आंकड़े आते रहे।
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किश्तवाड़ आपदा
- फोटो : अमर उजाला
60 लोगों के अब तक शव बरामद
पुलिस-प्रशासन ने 58 शव बरामद होने की बात कही। वहीं, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बताया कि 60 लोगों के अब तक शव बरामद कर लिए गए हैं। शनिवार तक 111 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। अठोली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, किश्तवाड़ जिला अस्पताल, डोडा व जम्मू जीएमसी में इनका उपचार चल रहा है।
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किश्तवाड़ आपदा
- फोटो : अमर उजाला
लापता लोगों में लगभग 75 लोगों के नाम सामने आए, हालांकि आंकड़ा करीब 200 बताया जा रहा है। 23 शवों की पहचान अठोली में की गई। इनमें से 10 लोग चिशोती के ही रहने वाले थे। गांव के चार लोग अब भी लापता हैं। दो शवों की किश्तवाड़ में शिनाख्त हुई। बाकी की अभी शिनाख्त नहीं हो सकी है।
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किश्तवाड़ आपदा
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लापता लोगों की तलाश में मलबे को युद्धस्तर पर हटाया जा रहा है। सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सीआईएसएफ और पुलिस की टीमें लगातार राहत-बचाव कार्य में जुटी हैं। गांव में जेनरेटर से बिजली और पाइप लगाकर पानी की आपूर्ति बहाल की गई है। मदद के लिए लोग आगे आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के खाने-पीने और पहनने के लिए कपड़े लोग पहुंचा रहे हैं।
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किश्तवाड़ आपदा
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सीएम और केंद्रीय मंत्री ने लिया राहत-बचाव कार्य का जायजा
शुक्रवार रात केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और शनिवार सुबह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला चिशोती पहुंचे। स्थानीय निवासियों व आम जनता ने इस घटना को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की। लोगों ने कहा कि उनका गांव खतरे में है। इस पर मुख्य मंत्री ने कहा कि एक्सपर्ट की एक टीम बनाई जाएगी जो सर्वे करेगी। उन्होंने कई घोषणाएं कीं।
अपनों की तलाश में पहुंच रहे लोग
जो श्रद्धालु दर्शन करने आए थे और आपदा के बाद से लापता हैं उनके परिजन उनकी तलाश में घटनास्थल पर पहुंच रहे हैं। आपदा के बाद से चिशोती निवासी डरे और सहमे हुए हैं। लोग उनके सहयोग व सहायता का भरपूर प्रयास कर रहे हैं। बचाव अभियान में जुटे लोगों की भी सहायता कर रहे हैं।