आतंक का दामन छोड़कर सेना में भर्ती हुए लांस नायक नजीर अहमद वानी को इस साल मरणोपरांत अशोक चक्र सम्मान मिलेगा। यह सर्वोच्च वीरता पुरस्कार दक्षिणी कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकवाद निरोधक अभियान के लिए मिला है, जिसमें लश्कर और हिजबुल मुजाहिदीन के छह आतंकी मारे गए थे। वानी दो बार सेना मेडल भी जीत चुके हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले के अश्मूजी गांव के नजीर एक समय खुद आतंकवादी थे। बाद में उन्हें गलती का अहसास हुआ और वह आतंकवाद छोड़कर 2004 में सेना में भर्ती हो गए। नजीर की तरह के लोगों को घाटी में इख्वान कहते हैं। आतंकियों के सफाया के लिए चलाए गए कई आपरेशन में शामिल हुए।
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23 नवंबर 2018 को जब वानी 34 राष्ट्रीय रायफ ल्स के साथियों के साथ ड्यूटी पर थे, तब इंटेलिजेंस से शोपियां के बटागुंड गांव में हिजबुल और लश्कर के छह आतंकियों के मौजूद होने की खबर मिली।
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इनपुट थे कि आतंकियों के पास भारी मात्रा में हथियार और गोले बारूद हैं। इस एनकाउंटर में वानी और उनके साथियों ने कुल छह आतंकियों को मार गिराया था। वानी ने दो आतंकियों को मारने और अपने घायल साथी को बचाते हुए सबसे बड़ा बलिदान दिया।
एनकाउंटर में वह बुरी तरह जख्मी हो गए थे और हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था। 26 नवंबर को अंतिम संस्कार से पहले वानी को उनके गांव में 21 तोपों की सलामी दी गई थी। वह अपने पीछे पत्नी और दो बच्चे छोड़ गए।